क्या हमे लीस पर आजादी मिली ? क्या 100 वर्ष बाद यानि 2047 मे अंग्रेज भारत मे वापस आजाएंगे ? जब 15 अगस्त को अग्रेज भारत छोड़ के गए तो फिर 26 जनवरी महत्वपूर्ण क्यों है ?
आज के वीडियो मे हम इन्ही प्रश्नों के
उत्तर को जानेंगे |
यह बात सत्य है की 15 अगस्त 1947 को
सत्ता का हस्तांतरण हुआ
था | गोरे अंग्रेजों से काले अंग्रेजों ने सत्ता सम्हाल ली | भारत को आजादी इंग्लैंड की संसद मे इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट, 2047 नामक कानून
बना के मिली |
तो क्या अंग्रेज उस कानून को निरस्त कर
देंगे तो भारत पुनः गुलाम हो जाएगा ?
इसके उत्तर को समझने के लिए हमे इंडियन
इंडेपेन्डेन्स एक्ट को समझना होगा | 4 जुलाई 1947 को इंग्लैंड के
निचले सदन हाउस आफ कामन्स मे कोमॉनस प्रस्तुत हुआ | वहा से पास हो के, वहा के उच्च
सदन, हाउस आफ लॉर्ड्स मे 15 जुलाई 1947 मे
प्रस्तुत किया गया |
दिनांक 18 जुलाई 1947 को यह प्रस्ताव
पारित हो गया |
जिसके अनुसार 15 अगस्त 1947 को भारत और
पाकिस्तान नाम ब्रिटेन के दो उपगणराज्य निर्मित होंगे |
कैबिनेट मिशन प्लान के अंतर्गत नवंबर
1946 को संविधान सभा की योजना लाई जाती है और
दिनांक 6 दिसंबर 1946 को आधिकारिक तौर
पर गठित की जाती है | 9 दिसंबर 1946 को इसकी आधिकारिक बैठक होती है |
26 नवंबर 1949 को संविधान, सभा द्वारा पूर्ण हो जाता है
इसके आर्टिकल 5
6 7 8 9 60 324 366 367 379 380 388 391 392 393 294 तुरंत प्रभावी हो जाते है बाकी 26
जनवरी 1950 से उसे प्रभावी किया जाता है |
24 जनवरी 1950
को संविधान की प्रति पर हस्ताक्षर किए जाते है
और अब आते है
की हमारे पहले प्रश्न पर 26 जनवरी ही क्यों ?
15 अगस्त से प्रभावी
करते तो एक छुट्टी बचती
तो इसके लिए भी
अभी हमे फिर पीछे चलना पड़ेगा |
गवर्मेंट आफ
इंडिया एक्ट 1919 की समीक्षा के लिए साइमन कमीशन नवंबर 1927 मे आया था |
जी हाँ, वही
साइमन कमीशन जिसके विरोध करते हुए लाला लाजपत राय की जान गई थी उनका बदला लेने के
लिए भगत सिंह राजगुरु सुखदेव ने अपना बलिदान दिया और वही साइमन कमीशन जिसका स्वागत
करने वालों मे अंबेडकर अग्रणी था |
भारत मे
संवैधानिक सुधारो के लिए आए आयोग मे भारतीय ही नहीं थे इसका विरोध तो होना ही था
| यह एक प्रकार की भारतीयों के मुह पर तमाचा था की भारतीय स्वयं अपना देश सम्हालने
योग्य नहीं | इस से पूर्व भारत के सेक्रेटरी आफ स्टेट लार्ड बिरकिनहेड
ने चुनौती दी थी, “की भारतीयों को
अपना स्वयं का संविधान प्रस्तुत करने दो, जो सबके लिए समानता के समझौते पर आधारित
होगा |”
साइमन कमीशन के
आने पर इस चुनौती को गंभीरता से लिया गया | दिसंबर 1927 के कांग्रेस के मद्रास
अधिवेशन मे साइमन के विरोध के अलावा भारत के संविधान निर्माण करने पर सहमति बनी |
इसके लिए सभी राजनीतिक दलों की बैठक 19 मई 1928 को गठित की गई | जिसमे नए संविधान
के निर्माण के लिए समिति गठित की गई, जिसके चेयरमैन मोतीलाल नेहरू और सचिव जवाहर
लाल नेहरू थे, इसमे अली इमाम, तेज बहादुर, सप्रू, सुभाष चंद्र बोस, एम आर जयकर एवं
एनी बीसेंट भी थी | जिसकी रिपोर्ट अगस्त 1929 तैयार हो गई | जिसे नेहरू रिपोर्ट भी
कहते है |
ये संविधान
विधिक तरीके से लिखा गया था जिसमे 22 अध्याय और 87 लेख थे परंतु भारत को ब्रिटेन
का उपगणराज्य ही बनाने का प्रस्ताव था |
इस संविधान मे
मुस्लिम जहा अल्पसंख्यक है उनके लिए विधान मण्डल मे सीटे आरक्षित करने का प्रावधान
था | मुस्लिमो के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र का प्रावधान नहीं था जैसा की कांग्रेस
और मुस्लिम लीग मे 1916 मे समझौता हुआ था जिसे लखनऊ पैक्ट के नाम से भी जाना जाता
है | ऐसी ही मांग अंबेडकर की भी थी महारों के लिए |
दिसंबर 1929 मे
कुछ बदलावों के साथ नेहरू रिपोर्ट का प्रकाशन किया गया |
ये वो समय था जब भगत सिंह की लोकप्रियता चरम पर
थी | स्वाधीनता से कोई समझौता नही के विचार लोगों के मन मे आ गए थे | ऐसे मे 31
दिसंबर 1929 को कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन मे पूर्ण स्वराज्य की घोषणा करनी पड गई |
26 जनवरी 1930
को कांग्रेस ने अपना पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया |
अब आते है 15
अगस्त अंग्रेजों ने क्यों चुना वे भी तो कांग्रेस पर दया दिखाते हुए 26 जनवरी 1947
का दिन रख सकते थे |
दरअसल 6 अगस्त
और 9 अगस्त 1945 को अमेरिका द्वारा जापान के दो महानगरों पर परमाणु बम गिराने के
पश्चात जापान के राजा द्वारा 15 अगस्त 1945 को समर्पण की घोषणा कर दी गई |
इसे अंग्रेजों
ने अपना मुक्ति दिवस या विजय दिवस माना |
इसलिए उनके लिए
ये दिन खास था और उन्होंने यही दिन का चुनाव किया |
अब इंडियन इंडेपेन्डेन्स एक्ट डोमिनीयन का दर्जा
दे रहा था | जिसके अंतर्गत जवाहर लाल नेहरू प्रधानमंत्री बने |
तो कांग्रेस को
भी अपना कुछ दिखाना था की उनकी कही तो चली भले देश बट गया |
इसलिए 26 जनवरी
1950 के दिन का निर्धारण किया गया |
तो 15 अगस्त को
स्वाधीनता दिवस कहना उचित नहीं होगा |
उपगणराज्य का
दर्जा मिला तो हम इसे उपगणराज्य तो कह सकते है और स्वाधीन तो हम पूर्णरुपेण कभी
हुए ही नहीं | पूर्ण स्वराज्य की लड़ाई अभी बाकी है |
अब हम हमारे
पहले प्रश्न पर आते है |
जब भारत को
अंग्रेज अपनी संसद मे कानून बना के गए तो क्या कानून बना के वापस आ सकते है ?
दरअसल इंडियन
इंडेपेन्डेन्स एक्ट की धारा 1 उपधारा 1 के अनुसार ये उपगणराज्य अपना स्वतंत्र
संविधान बना सकते है | अतैव भारत ने अपना संविधान बना लिया |
इसकी धारा 6
उपधारा 2 ये स्पष्ट करती है की कोई भी विधि या प्रावधान इस उपगणराज्य के बनाए
विधान मंडल का कोई भी कानून इस आधार पर निरस्त नहीं होगा की वह इंग्लैंड के कानून
के विपरीत है और उपगणराज्य के विधान मण्डल को आधार होगा इस तरह के बने कानूनो को
निरस्त करने का |
भारतीय संविधान
के आर्टिकल 395 से इंडियन इंडेपेन्डेन्स एक्ट और गवर्मेंट आफ इंडिया एक्ट 1935 को
निरस्त कर दिया गया |
हाँ इंग्लैंड
ने अवश्य इंडियन इंडेपेन्डेन्स एक्ट को निरस्त नहीं किया है परंतु उसकी निरस्तता
का अन्य अर्थ भी लिया जा सकता है |
भारत स्वयं को
एक संप्रभु राष्ट्र घोषित कर चुका है |
तो ऐसे मे
इंग्लैंड विपरीत परिस्तिथियों मे सीधे तो नहीं आ सकता है | भविष्य मे यदि हम प्रबल
न हुए तो नेटो का प्रयोग कर के पाकिस्तान आदि की सहायता भले कर दे |
वैसे भी भारत
इस्लामिक आतंकवाद और दलित आतंकवाद मे फसता जा रहा है | इंग्लैंड की फुट डालो राज
करो की असली योजना अब फल देने लगी है |
हमे हमारे
राष्ट्र की संप्रभुता को बनाए रखते हुए पूर्ण स्वराज्य की स्थापना करनी है ऐसा
संकल्प लेना होगा |