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Tuesday, 26 February 2019

प्रधानमंत्री मोदी के साहसिक निर्णय

साहस के कारण आपके आलोचक भी आपके प्रशंसक बन जाते है | हां कभी-२ 
साहस को दुःसाहस भी कहाँ जाता है कुछ निर्णयों को परन्तु उसमे भी साहस तो जुड़ा है | भारतीय वायु सेना की कार्यवाही से पूरा देश गदगद है | ये होना चाहिए ये ऐसा कुछ है जो कांग्रेस से अलग है | इन्ही विषयो पर हम आज लिख रहे है |  इसमें वो निर्णय भी सम्मलित है जो हम समाज के हितकर नहीं मानते पर निश्चित तौर पर वे निर्णय साहसिक रहे है | प्रधानमंत्री भाषण में गलतिया कर सकते है और हम आलोचना कर सकते है हम कह सकते है इंदिरा जैसा कुछ कर के दिखाओ तो हम हवा में हाथ हिलाने को नकार देंगे | पर अब कुछ है जिसके लिए प्रधानमंत्री को स्मरण रखा जा सकता है क्योकि इस से भारत की सामरिक रणनीति की दिशा निर्धारित होगी | बहुत समय पश्चात हमारी रणनीति में बदलाव आया है | राजनितिक लाभ हो तो भी अच्छा है होना ही चाहिए | ये लेख उन आम पाठको के लिए नहीं है जो अंधभक्ति करते है ये उनके लिए है जिन्हे देश से प्यार है और जो संतुलन को समझते है | हमारी नाराजगी है की राम मंदिर नहीं बना, गौ रक्षा पर कानून नहीं आया, ३७० नहीं हटी, समान नागरिक सहिंता नहीं बनी पर वो अधिकार है क्यों की जो लिखित में मैनिफेस्टो में लिखा उसका सवाल जनता मांगेंगी | फिर आर्थिक नीतियों में भी कोई परिवर्तन नहीं आया वे भी कांग्रेस की ही रही वो विदेशी निवेश हो या आधार कार्ड का विषय, या नरेगा या जी.एस.टी इत्यादि पर कुछ निर्णय जो की किसी भी प्रधानमंत्री का कर्तव्य है होना चाहिए और आपने किया उस की  स्वर  प्रशंसा होनी चाहिए | आशा यही करता हूँ की ऐसे निर्णय हो जो कांग्रेस और गांधीवादी अहिंसा से पीड़ित भारत की नीतियों को बदले और हमारे जैसे आलोचक नोटा छोड़ २०१४ की तरह पूर्ण समर्थन में आजाये | 
आइये गिनते है उन सभी साहसिक निर्णयों को उनमें से कुछ  निर्णयों  मैं असहमत हो सकता हूँ  पर वे निर्णय साहसिक कहे जाएंगे | प्रसंशा सबसे अंत में 
१.नोटबंदी  : नोटबंदी को मैं तो घोटाला तक कहता हूँ क्योकि नॉट छापने की उस निजी कम्पनी को सीधे लाभ मिला इस से | पर इसका सकारात्मक प्रभाव जब नहीं हुआ सिवाए इसके की क्षेत्रीय दलों की कमर टूट गई | जो छोटे भ्रष्ट लोगो का पैसा था छोटे भ्र्ष्ट यानि १०० से ५०० करोड़ तक के भ्र्ष्ट उन्हें हानि हुई पर देश को बहुत अधिक हानि हुई अर्थ व्यवस्था को हानि हुई | नॉट बंदी के प्रमुख नुक्सान ये मैं लिख चूका हूँ | पर निर्णय साहसिक था उस से भी बढ़कर जनता को सम्हाल लेना की असर न दिखे पर जनता भूल ही गयी  | 
२. जी.एस.टी : एक केंद्रीय कर प्रणाली से राज्यों के कर  निर्धारण का अधिकार चला गया पर देखिये विपक्ष में एक भी व्यक्ति नहीं जो केंद्रीय कर प्रणाली की हानिया गिना सके | व्यापार को आने वाले समय में जो हानि होगी वो सब देखेंगे इसके साथ आर्थिक अस्थिरता और अपराध को भी बढ़ाएगी ऐसी कर प्रणाली इस पर विस्तार से यहाँ पढ़े 
३.एस सी एसटी एक्ट : इस अपराध के लिए तो क्षमा ही नहीं है  ही लिख चुके है |  पर अपने ही वोटरों को अपराध पूर्व अपराधी घोषित करना बहुत बड़ा अन्याय है | दुस्साहस तो नहीं कहूंगा प्रधानमंत्री पद पर है पर ये गलत निंदनीय निर्णय था है और रहेगा | 
४.सर्जिकल स्ट्राइक और उसको बताना : इसपर राजनीत हुई पर इसका सकारात्मक पक्ष ये है की बताया दायित्व लिया तो ये अच्छी बात रही | 
५.पुलवामा का प्रतिशोध एयर रेड : पुलवामा का प्रतिशोध अति आवश्यक था | जैशे मोहम्मद को नहीं पता था की इस हमले से किसको लाभ होगा ? आई एस आई और  सी आई ए दोनों की आवयश्कता केंद्र में मोदी का होना है पर फिर भी जवाब देना और उसका दायित्व लेना आवश्यक था | 


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