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Sunday, 2 June 2019

डा. बाबा साहब आंबेडकर की २२ प्रतिज्ञाएँ

आज कथित हिंदूवादी दल से लेकर हर एक डा. अम्बेडकर को महान बताने पर तुले हुए है | महानता एक सापेक्ष विषय हो सकता है जब समाज बट जाए | आर्य समाज की स्थापना करने वाले, दलितों को भी एक सामान वेद की शिक्षा जनेऊ का अधिकार देने वाले देश धर्म जाती उद्धारक स्वामी दयानन्द, दलितोद्धार का कितना काम करने वाले महान सन्यासी गुरुकुल कांगड़ी के संस्थापक, हिन्दू शुद्धि सभा के अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानन्द, देश के लिए अनेको अनेक यातनाये झेलने वाले वीर सावरकर के दलितों के लिए कार्य नहीं बताता पर डा. अम्बेडकर को एकाएक महान बताने की झड़ी लग गयी है प्रतिमाये लगने लग गयी है | आरक्षण  का लाभ लेते लेते ७० साल हो चुके है क्या ये हिन्दू धर्म के दमन का दौर आगया है | सत्य को इस प्रकार कब तक छुपाया जाएगा | आंबेडकर जिन्हे जीते जी जन मत ने नकार दिया था और बुरी तरह नकार दिया था |
खैर डा. अम्बेडकर ने हिन्दू धर्म त्याग कर बौद्ध मत स्वीकारा और २२ प्रतिज्ञाएं ली जो निम्न है और अंतरजाल पर हर जगह मिल जायेगी | उन्हें जानिये और अपनी राय बनाइये
बौद्ध धर्म की दीक्षा लेने के लिए 22 प्रतिज्ञाएं:-


1. मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश को कभी ईश्वर नहीं मानूंगा और न ही मैं उनकी पूजा करूंगा.
2. मैं राम और कृष्ण को कभी ईश्वर नहीं मानूंगा, और न ही मैं उनकी पूजा करूंगा.
3. मैं गौरी, गणपति जैसे हिंदू धर्म के किसी देवी देवता को नहीं मानूंगा और न ही उनकी पूजा करूंगा.
4. ईश्वर ने कभी अवतार लिया है, इस पर मेरा विश्वास नहीं.
5. मैं ऐसा कभी नहीं मानूंगा कि तथागत बौद्ध विष्णु के अवतार हैं. ऐसे प्रचार को मैं पागलपन और झूठा समझता हूं.
6. मैं कभी श्राद्ध नहीं करूंगा और न ही पिंडदान करवाऊंगा.
7. मैं बौध धम्म के विरुद्ध कभी कोई आचरण नहीं करूंगा.
8. मैं कोई भी क्रिया-कर्म ब्राह्मणों के हाथों से नहीं करवाऊंगा.
9. मैं इस सिद्धांत को मानूंगा कि सभी इंसान एक समान हैं.
10. मैं समानता की स्थापना का यत्न करूंगा.
11. मैं बुद्ध के आष्टांग मार्ग का पूरी तरह पालन करूंगा.
12. मैं बुद्ध के द्वारा बताई हुई दस परिमिताओं का पूरा पालन करूंगा.
13. मैं प्राणी मात्र पर दया रखूंगा और उनका लालन-पालन करूंगा.
14. मैं चोरी नहीं करूंगा.
15. मैं झूठ नहीं बोलूंगा.
16. मैं व्याभिचार नहीं करूंगा.
17. मैं शराब नहीं पीऊंगा.
18. मैं अपने जीवन को बुद्ध धम्म के तीन तत्वों-अथार्त प्रज्ञा, शील और करुणा पर ढालने का यत्न करूंगा.
19. मैं मानव मात्र के विकास के लिए हानिकारक और मनुष्य मात्र को उच्च– नीच मानने वाले अपने पुराने हिंदू धर्म को पूर्णत: त्यागता हूं और बुद्ध धम्म को स्वीकार करता हूं.
20. यह मेरा पूर्ण विश्वास है कि गौतम बुद्ध का धम्म ही सही धम्म है.
21. मैं यह मानता हूं कि अब मेरा नया जन्म हो गया है.
22. मैं यह प्रतिज्ञा करता हूँ कि आज से मैं बुद्ध धम्म के अनुसार आचरण करूंगा.
श्रोत : आजतक 

इसका वीडियो रुपातरण
https://youtu.be/EQBzpojo570


1989 के बाद से उत्तर प्रदेश में कोई ब्राह्मण मुख्यमंत्री नहीं बना

भारत में सर्वाधिक ब्राह्मणो की जनसँख्या उत्तर प्रदेश में है, अनुमानतः लगभग २ करोड़ बताई जाती है जो कुल आबादी का १० प्रतिशत हुआ | उत्तराखंड प्रतिशत अनुसार नंबर  १ पर है जहा २० प्रतिशत ब्राह्मण जनसंख्या है | इतनी बड़ी आबादी के उपरान्त भी ब्राह्मणो को पिछले ३० वर्षो  में उत्तर प्रदेश में भाजपा द्वारा सत्ता से दूर रखा गया |
नारायण दत्त तिवारी जो की कांग्रेस से थे उनके बाद से कोई भी ब्राह्मण मुख्यमंत्री नहीं बनने दिया गया है | और ख़ास बात है समय, ये समय था आर्थिक उदारीकरण का १९९१ का जब भाजपा की सरकार आयी कल्याण सिंह को मुख्यमंत्री बनाया गया |
१९९१ में केसरी नाथ त्रिपाठी एक बड़े वरिष्ठ नेता थे उन्हें स्पीकर बना दिया गया उत्तर प्रदेश विधान सभा का |
बीच में राष्ट्रपति शासन रहा पर मुलायम सिंह और मायावती का दौर आरम्भ हो चूका था | १९९७ में पुनः भाजपा को अवसर मिला |
३ जून १९९५ को मायावती मुख्यमंत्री बनी | मुख्य मंत्री बनने के कुछ घंटे पहले ही मीरा गेस्ट हाउस के कमरा नंबर १ | बाहर समाजवादी गुंडे थे | उत्तर प्रदेश के उभरते हुए नेता ब्रह्म दत्त द्विवेदी को उन्होंने मदद को फोन मिलाया और वे समय पर आ भी गए | उनकी जान बचाई इस बात से मायावती इंकार  नहीं करती |
अब यहाँ १३ वी विधानसभा के खेल को जानना आवश्यक है | पहले ये भंग हुई फिर मायावती को सरकार बनाने का अवसर मिला | मायावती के साथ बारी बारी सरकार चलाने में ये निश्चित था की उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री ब्रह्म दत्त द्विवेदी ही होंगे | ये बड़ा काटा थे गैर ब्राह्मण राजनितिक लॉबी के लिए | कल्याण सिंह का नाम जिसमे ऊपर आता है | १० फरवरी १९९७ को ब्रह्म दत्त द्विवेदी जी हत्या कर दी गई | वे एक तिलक समारोह से लौट रहे थे उनके साथ उनका सुरक्षा अधिकारी बी की तिवारी भी मारा गया | यु पी में राष्ट्रपति शासन था कह सकते है अराजकता का दौर था |
उसी वर्ष एक ब्राह्मण दरोगा की भी हत्या हुई थी मामला बना दिया गया था शिवपाल सिंह यादव की जान बचाने में जान गयी | ये विषय फिर कभी अराजकता का दौर समझने के लिए इतना पर्याप्त है |
ब्रह्मदत्त जी की हत्या में विधायक विजय सिंह और गैंगस्टर संजीव माहेश्वरी को २००३ में सी बी आई कोर्ट में आजीवन कारावास की सजा सुनाई जिसे २०१७ में हाई कोर्ट उत्तर प्रदेश ने यथावत रखा | हाला के विजय सिंह चुनाव जीतते आये है | लल्लनटॉप की रिपोर्ट के अनुसार हत्या के दो दिन पहले तक विधायक साक्षी महाराज और सपा नेता उर्मिला राजपूत के यहाँ खाना खाते रहे | कल्याण सिंह और राजनाथ सिंह का नाम भी आता रहा |
फिर मायावती के ६ महीने के शासन के पश्चात कल्याण सिंह मुख्यमंत्री बने | कल्याण सिंह मुख्यमंत्री बने | कल्याण सिंह के पश्चात एम एल सी राम प्रकाश गुप्ता मुख्यमंत्री बने जो लम्बे समय तक मुख्यमंत्री रहे | फिर उन्हें हटा के कल्याण सिंह को मुख्यमंत्री बनाया गया जो वर्ष २००२ तक सत्ता में रहे | फिर सपा बसपा का दौर उत्तर प्रदेश में चला | मायावती, मुलायम सिंह फिर अखिलेश और अब योगी आदित्यनाथ |
अब देखने योग्य बात है की ब्रह्म दत्त की हत्या के बाद कई बड़े नाम थे भाजपा में मुख्यमंत्री पद के लिए | राम प्रकाश त्रिपाठी भी काफी लम्बे समय से चुनाव जीतते आरहे थे उन्हें सहकारिता मंत्री बना दिया गया था | अन्य कई बड़े नाम जिन्हे हम भाजपा में जानते है जैसे की रमापति राम त्रिपाठी, कलराज मिश्र, ह्रदय नारायण दीक्षित जो की वर्तमान में उत्तर प्रदेश विधान सभा के स्पीकर है इसके अतिरिक्त भी ब्राह्मण समाज किस हद तक भाजपा और संघ से जुड़ा हुआ है ये हम सब जानते है | पर ब्राह्मण समाज को ही पीछे धकेलने में भाजपा कोई ताकत नहीं छोड़ती |
ऐसा क्यों है ? १९८९ में बाद सम्भव है कांग्रेस में ब्राह्मणो का वर्चस्व के कारण भाजपा स्वयं को अलग दिखाना चाहती हो | या ये भी संभव है की मंडल कमीशन और राम मंदिर के दौर में जो देश में आर्थिक लूट आरम्भ करवाई गयी उदारीकरण के नाम पर उस पर ब्राह्मण ही सर्वाधिक विरोध कर रहे थे जिसका एक उदाहरण स्वर्गीय श्री राजीव दीक्षित है | अंतराष्ट्रीय ताकते भी ब्राह्मणो को अपना शत्रु मानती है |
मैं यहाँ जातिवादी कारणों से इस लेख को नहीं लिख रहा | मैं वर्णाश्रम व्यवस्था को मानता हूँ ऋषि दयानन्द के सिद्धांतो को मानता हूँ ये लेख इसलिए लिखा की ब्राह्मण समाज को अपनी स्तिथि समझनी चाहिए | विधायक बन जाने से आपकी हैसियत बस अपने क्षेत्र के थाने भर की है | कितनी चलती है वर्तमान सरकार में ये तो वही बता सकते है जो चुन के आये है | ५१ SC सांसदों ने पत्र लिख कर भेज दिया और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सुप्रीम कोर्ट का आदेश पलट दिया, यह इमराना मामले से कैसे अलग हुआ ? यदि वह मुस्लिम तुष्टीकरण था श्री राजीव गांधी द्वारा तो ये दलित तुष्टीकरण है | आज ब्राह्मण समाज के लोग झाड़ू लगाने की नौकरी के लिए आवेदन कर रहे है | खैर काम कोई बुरा नहीं बस वर्ण व्यवस्था को स्वीकारिये, ब्राह्मण में सभी वर्ण समाहित है पर ज्ञानी और त्यागी होना उसका स्वाभाविक गुण है | ये लेख ब्राह्मण विरोध को प्रदर्शित करने को नहीं था अपितु ब्राह्मण समाज के पिछड़ने और  उसके कारणों पर चिंतन करने के लिए लिखा था | मुँह में पान मसाला गुटखा भर के आप स्वयं को ब्राह्मण नहीं कह सकते |  एक दलित नेता की जान बचा के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता खोला एक ब्राह्मण ने और उत्तर प्रदेश की राजनीत बदल गयी उसके उपरान्त भी ब्राह्मणो को ही दलितों के शोषण के लिए आरोप लगाया जाता है | सत्ता केवल सत्य की, जो भी समाज के लिए सोचेगा और करेगा समाज उसे स्वीकार करेगा | आत्म सुधार की ओर चलिए.....


Thursday, 18 April 2019

देसी घी बनाने की विधि

घी जिसे संस्कृत में धृत कहाँ जाता है । भारत मे इतनी मिलावट की समस्या है कि यहाँ मध्यम वर्ग तो अपने घरों में स्वयं ही धृत बनाने लगा है । घृत या घी अमृत है, जीवन वर्धक है । दाल, सब्जी, रोटी, ब्रेड अनेको अनेक प्रकार से आप इसका प्रयोग कर सकते है । विटामिन्स के अवशोषण में भी ये बहुत ही सहायक है । हाँ यदि कफ की प्रकृति है शरीर मे तो इसका अधिक सेवन न करे । घी दूध का वो स्वरूप है जो खराब नही होता लंबे समय तक यदि उचित प्रकार से रखा जाए । पानी से इसे सदैव बचाया जाना चाहिए । तो भिन्न तरीके जानते है जिनसे ये भारत मे बनाया जाता है ।

1. घरेलू विधि
घर मे जो दूध आता है उसे हम गर्म कर देते है ताकि फ़टे न, तत्पश्चात जब वह ठंडा हो जाता है तो उसे हम फ्रिज यानी कि रेफिरजरेटर में रख देते है । इस से मोटी मलाई पड़ जाती है । अब इसमें बहुत से घरों में लंबे समय तक मलाई को इकट्ठा किया जाता है जिस से घी बनाते समय बदबू तक आती है जो कि सही तरीका नही है । थोड़ा-2 कर के बनाये पर शुद्ध तरीके से बनाये ।
इस मलाई को कुछ तो सीधे कढ़ाई में गर्म करते है और तब तक गर्म करते है जब तक घी अलग न हो जाये । कंछुली निरन्तर चलाये रखनी होती है । इसमे बाय प्रोडक्ट अधिक निकलता है जिसे शक्कर डाल के खाया जा सकता है यदि अधिक जला न हो ।
इसे और अधिक घी निकालना हो तो इस मलाई को मिक्सर में चला लेना चाहिए । जिस से मक्खन निकलेगा । मक्खन से अधिक धृत की प्राप्ति होगी ।

2. बिनोला विधि
इसे प्राचीन विधि कहा जाता है । दुग्ध को दही बना लिया जाता है । दूध में दही का जामन या निम्बू का रस या इमली डाल के उसे फर्मेंटेड किया जाता है । तत्पश्चात उसे फेटा जाता है । जिस से मक्खन ऊपर तैरने लगता है । इस मक्खन को गर्म कर के घृत में परिवर्तित कर लिया जाता है । और छाछ यानी वो बचा हुआ दुग्ध का स्वरूप छाछ के रूप में प्रयोग कर लिया जाता है । उसको लोग नमक और मसाला डाल के पीते है जो कि पेट के लिए लाभ दायक होता है । बल्कि कुछ स्थानों में मठा आलू की सब्जी भी बनाई जाती है जिसमे इसे ग्रेवी के तौर पर प्रयोग किया जाता है ।

3.व्यवसायिक विधि
इसमे मशीनों का प्रयोग किया जाता है । अतः घरेलू प्रयोग के लिए हमे उतना विस्तार में जाने की आवश्यकता नही है ।

ये समझना होगा कि 1 किलो दूध में लगभग 4 से 8 प्रतिशत तक फैट होता है । निर्भर करता है गौ की प्रजाति, उसका भोजन, मौसम आदि पर । भैस के दूध में थोड़ा अधिक फैट होता है लाभ में गौ धृत के समान नही होता ।
घी का सेवन जब प्रजा में बढ़ेगा तो अपने आप ही लोगो का स्वास्थ्य सुधरेगा । लोगो की औसत आयु बढ़ेगी । अतः आप लोग जागरूक होइए । घरेलू घी बनाइये अन्यथा शुद्ध घी खरीदिए । जो सक्षम है वे गौ पालन करे । स्वास्थ है तो धन का होना सार्थक है । यदि स्वयं नही पाल सकते तो किसी ठीक प्रकार की चलने वाली गौ शाला से जुड़ जाइये । भारत मे दूध पानी से सस्ता होना चाहिए । बल और बुद्धि दोनो का प्रदाता दूध और उसके उत्पाद ही है । इति

Tuesday, 26 February 2019

प्रधानमंत्री मोदी के साहसिक निर्णय

साहस के कारण आपके आलोचक भी आपके प्रशंसक बन जाते है | हां कभी-२ 
साहस को दुःसाहस भी कहाँ जाता है कुछ निर्णयों को परन्तु उसमे भी साहस तो जुड़ा है | भारतीय वायु सेना की कार्यवाही से पूरा देश गदगद है | ये होना चाहिए ये ऐसा कुछ है जो कांग्रेस से अलग है | इन्ही विषयो पर हम आज लिख रहे है |  इसमें वो निर्णय भी सम्मलित है जो हम समाज के हितकर नहीं मानते पर निश्चित तौर पर वे निर्णय साहसिक रहे है | प्रधानमंत्री भाषण में गलतिया कर सकते है और हम आलोचना कर सकते है हम कह सकते है इंदिरा जैसा कुछ कर के दिखाओ तो हम हवा में हाथ हिलाने को नकार देंगे | पर अब कुछ है जिसके लिए प्रधानमंत्री को स्मरण रखा जा सकता है क्योकि इस से भारत की सामरिक रणनीति की दिशा निर्धारित होगी | बहुत समय पश्चात हमारी रणनीति में बदलाव आया है | राजनितिक लाभ हो तो भी अच्छा है होना ही चाहिए | ये लेख उन आम पाठको के लिए नहीं है जो अंधभक्ति करते है ये उनके लिए है जिन्हे देश से प्यार है और जो संतुलन को समझते है | हमारी नाराजगी है की राम मंदिर नहीं बना, गौ रक्षा पर कानून नहीं आया, ३७० नहीं हटी, समान नागरिक सहिंता नहीं बनी पर वो अधिकार है क्यों की जो लिखित में मैनिफेस्टो में लिखा उसका सवाल जनता मांगेंगी | फिर आर्थिक नीतियों में भी कोई परिवर्तन नहीं आया वे भी कांग्रेस की ही रही वो विदेशी निवेश हो या आधार कार्ड का विषय, या नरेगा या जी.एस.टी इत्यादि पर कुछ निर्णय जो की किसी भी प्रधानमंत्री का कर्तव्य है होना चाहिए और आपने किया उस की  स्वर  प्रशंसा होनी चाहिए | आशा यही करता हूँ की ऐसे निर्णय हो जो कांग्रेस और गांधीवादी अहिंसा से पीड़ित भारत की नीतियों को बदले और हमारे जैसे आलोचक नोटा छोड़ २०१४ की तरह पूर्ण समर्थन में आजाये | 
आइये गिनते है उन सभी साहसिक निर्णयों को उनमें से कुछ  निर्णयों  मैं असहमत हो सकता हूँ  पर वे निर्णय साहसिक कहे जाएंगे | प्रसंशा सबसे अंत में 
१.नोटबंदी  : नोटबंदी को मैं तो घोटाला तक कहता हूँ क्योकि नॉट छापने की उस निजी कम्पनी को सीधे लाभ मिला इस से | पर इसका सकारात्मक प्रभाव जब नहीं हुआ सिवाए इसके की क्षेत्रीय दलों की कमर टूट गई | जो छोटे भ्रष्ट लोगो का पैसा था छोटे भ्र्ष्ट यानि १०० से ५०० करोड़ तक के भ्र्ष्ट उन्हें हानि हुई पर देश को बहुत अधिक हानि हुई अर्थ व्यवस्था को हानि हुई | नॉट बंदी के प्रमुख नुक्सान ये मैं लिख चूका हूँ | पर निर्णय साहसिक था उस से भी बढ़कर जनता को सम्हाल लेना की असर न दिखे पर जनता भूल ही गयी  | 
२. जी.एस.टी : एक केंद्रीय कर प्रणाली से राज्यों के कर  निर्धारण का अधिकार चला गया पर देखिये विपक्ष में एक भी व्यक्ति नहीं जो केंद्रीय कर प्रणाली की हानिया गिना सके | व्यापार को आने वाले समय में जो हानि होगी वो सब देखेंगे इसके साथ आर्थिक अस्थिरता और अपराध को भी बढ़ाएगी ऐसी कर प्रणाली इस पर विस्तार से यहाँ पढ़े 
३.एस सी एसटी एक्ट : इस अपराध के लिए तो क्षमा ही नहीं है  ही लिख चुके है |  पर अपने ही वोटरों को अपराध पूर्व अपराधी घोषित करना बहुत बड़ा अन्याय है | दुस्साहस तो नहीं कहूंगा प्रधानमंत्री पद पर है पर ये गलत निंदनीय निर्णय था है और रहेगा | 
४.सर्जिकल स्ट्राइक और उसको बताना : इसपर राजनीत हुई पर इसका सकारात्मक पक्ष ये है की बताया दायित्व लिया तो ये अच्छी बात रही | 
५.पुलवामा का प्रतिशोध एयर रेड : पुलवामा का प्रतिशोध अति आवश्यक था | जैशे मोहम्मद को नहीं पता था की इस हमले से किसको लाभ होगा ? आई एस आई और  सी आई ए दोनों की आवयश्कता केंद्र में मोदी का होना है पर फिर भी जवाब देना और उसका दायित्व लेना आवश्यक था | 


Sunday, 24 February 2019

क्या २००० रूपए में वोट खरीद रहे है मोदी



फरवरी के अंतिम सप्ताह में किसानो को २००० रूपए खाते में दे दिए गए |  ८ मार्च से आचार सहिंता लागू हो जायेगी |  इस से पूर्व किसानो को पैसा बाटने की योजना की घोषणा करी गयी थी |  उसे शीघ्रता से कार्यान्वित कर दिया गया | आश्चर्य है की इन्हे पौने चार साल बाद किसान याद आये ? और वो भी पैसा बाट के | किसानो की वास्तव में सहायता करनी है तो डी ए पी सस्ती करवा देते वो तो कही महंगी हुई साढ़े चार सालो में | एक ओर राहुल गांधी है जो कहते है की वो किसानो का ऋण माफ़ कर देंगे यदि कांग्रेस की सरकार आयी | ये भी वैसा ही प्रलोभन है दरअसल सरकारी खर्च पर ही सरकार बनाने का ताना बाना दोनों लोग बनाये बैठे है | यूरिया डी.ए.पी सस्ती नहीं करनी है, डीजल ही सब्सिडी पर दे देते वो भी नहीं, गोबर खरीदने की कोई योजना चला देते वो भी नहीं | गोचरा भूमि जो पुरे देश भर में अनाधिकृत कब्जे में है उसे मुक्त करने का आदेश दे देते, जैविक खेती के लिए कुछ विशेष सुविधा दे देते वो भी नहीं |
भारतीय खाद्यान निगम जिस प्रकार से अनाज के मूल्यों का निर्धारण करता है उसमे सुधार कर देते, वो भी नहीं किया | ये जो भीख बट रही है या कहा जाए रिश्वत दी जा रही है वो सिर्फ चुनाव जीतने के लिए | घटिया राजनीत का उदाहरण है ये जहाँ किसानो की समस्या से या देश पर बढ़ते कर्ज से इनको कोई लेना देना नहीं है | सत्ता मिले और वे लम्बे समय तक उसपे आसीन रह सके बस यही इनका परम ध्येय है |

Thursday, 14 February 2019

पढ़ाई मे अस्थिरता बढ्ने का कारण और उसका उपाय

हाल के वर्षो मे बच्चो को ये अस्थिरता की समस्या बढ़ गयी है | बच्चो को ही क्यो बड़ो को भी लोग अब पढ़ने मे स्थिर नहीं हैं | लोग पुस्तके पढ़ने की ओर ध्यान नही देते उसके तो अलग कारण है पर वे जो पढ़ना चाहते है उनके लिए भी स्थिर हो के अधिक से अधिक पन्ने पढ़ना अब दुष्कर हो रहा है |
इसका कारण जो मैंने समझा वह है सोशल मीडिया का प्रभाव | सोशल मीडिया का ऐसा ढ़ाचा है की सब कुछ बदलता  रहता है | 

हमारे संगीत के प्रति रुझान देख लीजिये कोई गाना कितना ही अच्छा क्यो न हो कुछ समय ही चलता है | फेसबुक मे बनी न्यूज फीड फीचर के कारण हम बराबर और कुछ और कुछ नया ढूंढने मे लगते है | यू ट्यूब का भी यही हाल है एक के बाद दूसरा वीडियो | हमारे मस्तिष्क को परिवर्तन का इतना अभ्यास हो जाता है की ये अत्यंत दुष्कर है की थोड़ा भी स्थिर हो पढ़ा जा सके और ध्यान लगाना तो और कठिन हो गया है | इसे सुधारने का यही तरीका है की फेसबुक एप डिसेबल कर दीजिये यू-ट्यूब देखने का समय निर्धारित कर रखिए और अनुशासित तरीके से समय सीमा मे उसे समाप्त कर दीजिये | टी.वी जहा दिमाग का प्रयोग कम करता था सोशल मीडिया दिमाग को थकाता है और अस्थिरता की स्तीथि मे लाता है |

बाल काले रखने का सरल उपाय

युवा अवस्था मे बालो का सफ़ेद होना बहुत ही सामान्य बात हो गयी है | युवा पीढ़ी इस से जूझ रही है और बहुत बड़ा दवा और तेल उद्योग इस समस्या को लेकर विकसित हो गया है | यदि इस समस्या की जड़ को हम समझ सके तो हम इसे रोक पाएंगे या इसके प्रभाव को पलट पाएंगे | जी मैं ये लिख पा रहा हू क्यो की मेरे स्वयं के कई बार बाल सफ़ेद हुये और वापस से काले हो गए | 
इसे समझने को लेकर आपको मेलानिन नाम के एक पिग्मेंट के बारे मे जानना होगा | इसी पिग्मेंट के कारण हमारे शरीर का रंग निर्धारित होता है हमारे बालो का रंग निर्धारित होता है |
ये हमे सूर्य के पराबैगनी किरणों से बचाता है | हमारी कोशिका के न्यूक्लियाई को बचाता है तो ये हमारे डी.एन.ए को बचाता है | इसके बनने मे रुधिर के ही एक प्रकार के कण मेलानोसाइट सहायक होते है | अब आप अनुमान कर सकते है ये कितना महत्वपूर्ण तत्व है | मेलानिन जितना अधिक होगा शरीर का रंग उतना काला होगा | मेलानिन टाइरोसिन नामक अमीनो एसीड (C9H11NO3) की सहायता से बनता है |
अब थोड़ा मेलाटोनिन के बारे मे भी समझते है | माइलटोनिन  मेलानिन बनाने मे सहायक होता है  जो रंग निर्धारण करता है और माइलटोनिन बनता है ट्रिपतोफैन(C11H12N2O2) नाम के अमीनो एसिड से | 
माइलटोनिन एक प्रकार का न्यूरोट्रांसमीटर होता है | ये निंद्रा से सीधे जुड़ा होता है और हमारी नींद की साइकल निर्धारण से जुड़ा होता है | मैलानिन आत की,  रटीना की, और पीनियल ग्रंथि की कोशिकाओ मे बनता है | 
अच्छी और समय पर नींद्रा लेने का सुझाव मैं यदि आपको आरंभ मे देता तो आप पूरा पढ़ते ही नही और समझने का प्रयास ही नही करते | हमारी दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो चुकी है 12-1 बजे से पहले हम शायद ही सोते हो | अतः हम लोगो को समय पर सोना है ये पहला विकल्प है बालो को सफ़ेद होने से बचाने के लिए | 
प्रोटीन की आपूर्ति सही होनी चाहिए शरीर मे | इसमे कद्दू के बीज जो की ट्रिपतोफैन का अच्छा सोर्स है भिन्न प्रकार से लिए जा सकते है पीस के | अब सबसे महत्वपूर्ण बिन्दु |
जब आप कमरे मे सोये तो पूरी तरह से अंधेरा कर ले | अंधेरे मे ही ठीक प्रकार से मेलाटोनिन बन पाता है | लोग आम तौर पर रोशीनी युक्त कमरे मे ही सोते है | ये सबसे कारगर उपाय होगा वापस से आपके बाल काले करने का इसे कर के देखिएगा |
बाल काले रखने के लिए आप तेल का नियमित प्रयोग कर सकते है | तेल का सबसे कारगर प्रभाव जो मैंने समझा है वो सिर को ठंडा रखता है | क्योकि ऊष्मा को अतिरिक्त पदार्ध मिल जाता है विस्तारित होने को बालो की जड़ो को कुछ अतिरिक्त सुरक्षा मिल जाती है |
ये लेख  उनके लिए है जिनके युवा अवस्था मे बालो के रंग मे परिवर्तन आगया | आयु बढ्ने के कारण सफ़ेद हुये बालो के लिए नियम प्रयोग किए जा सकते है पर वापस होने की संभावना न्यून रहती है |

Wednesday, 30 January 2019

मुँह के छाले ठीक करने का सरलतम उपाय

मुख के छाले बहुत ही पीड़ादायक होते है | कुछ लोगो को कभी-कभार हुए होंगे पर कुछ लोगो को ये बार बार निकल के आते है | ये गाल के अंदर जुबान आती पर होते है | पीड़ित व्यक्ति भली प्रकार से न कुछ खा सकता है न कुछ बोल सकता है |









हमें यदि इसका उपचार करना है तो हमें इसके कारणों को जानना होगा |  आम तौर पर आप डाक्टर के पास जाएंगे वो विटामिन बी के कैप्सूल लिख देगा | कारण पूछेंगे तो यही बताएगा की विटामिन की कमी | थोड़ा और बुद्धिमान डाक्टर हुआ तो विस्तार से बताएगा विटामिन का शरीर में अवशोषित न हो पाना |
विटामिन शरीर में क्यों नहीं अवशोषित हो रहे क्या आप अच्छा खा नहीं रहे ? पर गरीबो को तो छाले की शायद ही समस्या हो | अच्छा खाने पीने वाले सक्षम लोग ही पीड़ित होते है |  शरीर और त्वचा के रोगो के सबसे प्रथम कारण रक्त में अम्लता बढ़ना है | रक्त हल्का क्षारीय स्वभाव का होता है और अम्लता बढ़ने से ही अनेको रोग लगते है | तो छालो को ठीक करना प्राकृतिक तौर पर और उस प्रकार के वे हो ही न आपको अपने शरीर के रक्त को उसके स्वभाव में लाना होगा  | 


इसके लिए आपको बस एक ही काम करना होगा वो है जल पीना | अधिक से अधिक जल पीजिये तब विशेष तौर पर जब आपको छालो की समस्या हो | पेट की अग्नि शांत होगी तो पहले छालो में दर्द होना समाप्त होगा फिर वे गायब हो जाएंगे |  ये इसकी सरलतम जल चिकित्सा है |
इति शुभम 

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हवाई जहाज के भारतीय अविष्कारक शिवकर बापूजी तलपदे

शिवकर बापूजी तलपदे जी ने गत २०० वर्षो में प्रथम विमान की रचना की और उसे उड़ा कर भी दिखाया | ये विषय आर्य समाज के लेखको ने तो लिखा पर...