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Sunday, 8 October 2017

नोटबंदी के प्रमुख नुकसान

फेसबुक पर एक महोदय नोटबंदी के 3 फायदे नहीं गिना सके परन्तु १०० नुक्सान पूछने लगे | बाजार का हाल सब जानते है पर बेशर्मी कहे या विवेक शुन्यता जहा लोग राष्ट्रहित को देश की आर्थिक समृधि से नहीं जोड़ पा रहे | मिडिया हिन्दू मुस्लिम पर अटकाए है हम अटके है | नोटबंदी का केवल एक ध्येय था यू.पी चुनाव जीतना | सपा बसपा जैसी पार्टियों को बर्बाद करना हुआ भी वही | पर मूल्य बहुत अधिक था पुरे देश की अर्थव्यवस्था दांव पर लगा कर केवल अपने राजनितिक हित साधना मुझे तो देश द्रोह से कम नहीं लगता | १५ लाख ४४००० करोड़ में १५ लाख २८ करोड़ वापस आगये और गिनती अभी भी चल रही है | चलिए गिनते है नोटबंदी से हुए उन नुकसानों को जो आप सब जानते है पर थोड़े ही बोलने को तैयार है |
१.       अर्थव्यवस्था लम्बे समय के लिए क्षतिग्रस्त हो गई | 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ 5.7% का जी.डी.पी जो दिखा रहे है वो नए फार्मूले से पुराने से दिखाए तो जी.डी.पी 3-3.5% ही रह गई है |
२.       लोगो का व्यापार एक महीने पूरी तरह ही प्रभावित हो गया |
३.       जनता का लाइन में लगवा के समय बर्बाद करवाया |
४.       बैंक कर्मचारियों का अतिरिक्त समय लेकर समय बर्बाद करवाया |
५.       लाइन में लग कर १०० से ऊपर लोग पुरे देश भर में लोग मारे गए जिनके लिए कोई संवेदना नहीं प्रकट की गई |
६.       बैंको पर एन पी ए बढ़ गया जिस से बैंको को अपनी ब्याज दरे घटानी पड़ेगी |
७.       बैंको ने बचत खातो पर भी 4 प्रतिशत से घटाकर 3.5 प्रतिशत दर कर दी |
८.       लोग भी लोन नही ले रहे इस कारण बैंक अलग-2 प्रकार के फ़ालतू के सर्विस चार्ज वसूल रहे है |
९.       उस निजी नोट कम्पनी को अरबो का शुद्ध लाभ हुआ जिसको भारत सरकार के नोट छापने का ठेका मिला हुआ है |
१०.   सारा काला धन सफ़ेद हो गया | नोटबंदी से पैसा घूम गया भले वो 60:40 या 70:30 के अनुपात से लोगो ने घूमा के किआ हो आखिरी समय तो 50:50 के अनुपात में घूमा | तो अब देश में काला धन तो रह ही नहीं गया | १६०००  करोड़ और उस से भी कम काला धन माना जा सकता है पर इस से अधिक तो नोट छापने में लग गए |
११.   लोगो का मुद्रा की अर्थव्यवस्था से विश्वास हटा |
१२.   पेटीएम का लाभ बढ़ा उस समय अलीबाबा एक चीनी कम्पनी की हिस्सेदारी ४२ प्रतिशत थी अब ६२ प्रतिशत है | अप्रत्यक्ष रूप से पेटीएम कर के उन लोगो ने चीन को लाभ दिया जो झालरों का बड़ा विरोध करते थे |
१३.   प्रधानमन्त्री बार बार झूठ बोलते रहे | केवल पचास दिन और जिस चौराहे पर बुलायेंगे मैं आऊंगा ? क्या जनता ही हालत सुधरी काला धन जो नष्ट होने की आशा थी वो नष्ट हुआ ? और नष्ट धन को पुनः उत्पादित कर के जनता के हित में लाया गया ? नही
१४.   कभी डिजिटल इंडिया तो कभी काला धन बार-बार सरकार अपनी बात से पलटती रही | जनता को गुमराह करती रही |
१५.   २००० का नया नोट दौड़ा कर काला धन को रोकने का और तरीका बढ़ा दिया गया |

विस्तार से हर क्षेत्र के नुक्सान को लिख कर लेख को बढ़ाया जा सकता है जिसकी आवयश्कता नहीं है | बाजार का हाल उन्हें पता है जो बाजार में है | हमने एक चायवाले के हाथ में देश सौपा है जिसने सरकार में पार्टी के कार्यो को चाय पार्टी बना दिया और जनता निरी मुर्ख पर मुर्ख बने रहने को तैयार है |

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