Blog on Political, Economic, Social & Religious awareness and Reforms.
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Tuesday, 24 October 2017
भू-राजस्व में व्यापक सुधारों से न्यायिक सुधारो में क्रान्ति आएगी
हज़ारो हज़ार मामले न्यायलय में लंबित पड़े हुए है | अपराधिक मामलो से अधिकतर भूमि विवाद के विषय है | न्यायालय पर सरकार इसलिए ध्यान नही देती क्यों की उनसे उतनी कमाई नहीं है | जब की स्टैम्प ड्यूटी के नाम पर अच्छी कमाई करती है | ६-८% तक की स्टैम्प ड्यूटी उसके बाद 2 परसेंट की पर्ची काटने का शुल्क | कुछ हज़ार वकील का शुल्क इस प्रकार हर बार जब किसी भूमि का क्रय विक्रय होता है तो १० प्रतिशत से ऊपर का मूल्य उसका सरकार बढ़ा देती है | भूमि का स्थान तो वही रहना है मूल्य कागज़ पर बढ़ता रहता है, कारण सरकार की नीतिया जो की अंग्रेजो के समय से चली आरही है | जिस समय अंग्रेजो ने इसको लगाया था ऋषि दयानंद ने इसका विरोध किआ था | आज स्टैम्प ड्यूटी का विरोध करने वाला कोई है ही नही बड़ा आश्चर्य है |
Monday, 16 October 2017
क्या मोदी अमित शाह संघ को समाप्त कर देंगे ?
जो वर्षो से हिंदुत्व, श्री राम जन्म भूमि, गौ रक्षा आदि विषयों का समर्थन करते रहे है वे संघ के तौर तरीके कार्यशैली से परिचित है | संघ झूठ और अफवाह फैलाने को अपने तंत्र का हिस्सा मानता है | संघ द्वतीय विश्व युद्ध के उस दौर की मानसिकता से निकल नहीं पाया जहा हिटलर और चर्चिल दोनों ही अपनी अपनी जनता को झूठ परोसते थे | आज कैसे भी हो मोदी भी वही कार्यशैली अपनाए हुए है बस झूठ के आयाम बढ़ गए हैं | हम अपने आसपास देख कुछ रहे है और सरकारी आकडे कुछ और बोल रहे | वाट्सएप्प पर सिर्फ झूठ फैलाया जा रहा जिसे अब लोग समझने भी लगे है | जो कार्यशैली संघ ने अपने कार्यकर्ताओं को दी उसे सरकारी तंत्र पर प्रयोग कर के संघ और भाजपा स्वयं अपनी मुक्ति की ओर बढ़ रहे है |
हम कितना भी कोस ले संघ को पर ये सत्य है की हमें हिन्दुओ की हित की बात करने वाला एक संगठन चाहिए और बात ही नही कार्य करने वाला | भले संघ का योगदान रहा हो हिन्दू महासभा और आर्य समाज जैसे सशक्त राष्ट्रवादी हिन्दू संगठनों को निष्क्रिय करने और अभी भी बनाए रखने में पर अभी तो संघ ही है हमारे पास | मैं कितनी भी आलोचना कर लू जो के कार्यो के आधार पर ही होगी पर यही चाहूँगा की जिन विषयों पर इन्हें समर्थन मिलता आया है उन विषयों पर कार्य तो हो | भाजपा को जितना समय मिला उसने अपने स्तर पर भ्रष्टाचार किआ | निजी लाभ देने के मामले भी सामने आने लगे अमित शाह के पुत्र के रूप में |
देश में ही सिर्फ कुछ उद्योगपति ही लाभ उठा पा रहे है | मोदी और अमित शाह सत्ता के मद में चूर है आपको लगता है की आप पैसे के बल पर चुनाव जीत लेंगे | ये सूचना का युग है यहाँ झूठ चलता भी जाता है तो बहुत लम्बे समय तक नहीं चल सकता | आप जितना भी हिन्दू मुस्लिम कर ले आपको काम तो कर के देना ही पड़ता है | काम नहीं तो समर्थन नहीं |
भाजपा के अन्दर कोई नेता बोलने को तैयार नहीं | पुराने सारे नेता किनारे लगा दिए गए | एक जसवंत सिन्हा जी ने साहस दिखाया | राम जेठमलानी को बाहर कर दिया गया | सुब्रमण्यम स्वामी ने मना किआ था जी.एस.टी लागू करने का सही समय नहीं | अरुण शौरी ने भी वक्तव्य दिए जो लोगो तक पहुच नहीं पाए | आडवानी जी तो राष्ट्रपति योग्य भी नहीं थे | दलित कार्ड का खेल राष्ट्रपति चुनाव में ही खेला गया | भारतीय जनता पार्टी के दो शीर्ष नेतृत्व मोदी और अमित शाह को ये लगता है की पैसा खर्च कर के गाव देहात के वोट खरीद सकते है | जबरदस्त प्रचार कर सकते है | शायद वे जीत जाए, शायद | पर ये बात राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के लिए और बुरी होगी |
एक तो संघ और भाजपा की बृहद विस्तार की नीव जिन लोगो ने डाली थी उन्हें बाहर कर दिया गया | कही कोई कुछ बोल नहीं सकता | वही कांग्रेस की तरह हाई कमान कल्चर भाजपा में आगया | चापलूसी करो और बने रहो विरोध किआ तो बाहर जाओ | संघ के विचारको को विचार करना चाहिए की किसको कमान सौप दी | पर यहाँ तो उल्टा ही हो रहा है | पहले भागवत जी कहते है आरक्षण की समीक्षा होनी चाहिए फिर प्रधानमंत्री ने बोल दिया की आरक्षण नहीं हटेगा अब श्री मोहन भागवत ने भी बोल दिया आरक्षण पिछडो का हक़ है | क्या संघ को भी अब मोदी ही नियंत्रित कर रहे है ?
कहा गया वो हिंदी भाषा को प्रधानता देने का मुद्दा ? गौ रक्षा के लिए एक विधेयक नही पेश हो सका ? अब गौ रक्षा विधेयक पास न हो ऐसा संभव ही नहीं है | राज्य सभा की सबसे बड़ी पार्टी आप की है | और कम से कम पेश तो हो पता तो हो कौन गौ रक्षा के विरोध में है | पर न ही हिंदुत्व के विषय पर कार्य हुआ न विकास के | बुलेट ट्रेन मतलब बड़ा सौदा और राजनीत में बड़ी डील मतलब बड़ा कमिशन होता है | पैसा बेहिसाब होगा भाजपा के पास हो सकता है कांग्रेस ये देख कर अपना भण्डार इस बार भी न खोले | पर भाजपा के अगले और दस साल के शासन का मतलब ये हुआ की उसके अगले 20-30 साल लोग इनके बारे में सोचेंगे भी नहीं | सिर्फ तुष्टिकरण न हो इसलिए इन दो लोगो को सत्ता दिए रहना तो बहुत भारी मूल्य है |
बांग्लादेशी विस्थापितों को बाहर करेंगे हल्ला करेंगे रोहिंग्या के मुद्दे पर अटक गए | अरे अवैध बंगलादेशियो के लिए ही आप कानून बना देते जो आई.एम.टी.डी कांग्रेस ने समाप्त किआ था | रोहिंग्या के विषय पर या भविष्य में ऐसे किसी भी शरणार्थीयो के विषय पर एक सरल सा कानून बना कर ही आप इस विषय को अदालत में जाने से रोक सकते थे या अदालत के फैसले को देश हित के पक्ष में कर सकते थे | संघ से बहुत से लोग असंतुष्ट थे जो हिंदुत्व की विचारधारा से सहमत थे | हिंदुत्व की विचारधारा कोई भिन्न विचारधारा नहीं है | ये भी वही सहिष्णुता की ही विचाधारा है | तिलक के कांग्रेस से बाहर होते ही कांग्रेस ने समय समय पर मुस्लिम तुष्टिकरण और हिन्दू विरोध को प्रमुखता से पकड़ लिया था जिस कारण हिन्दू महासभा जिसका मतलब हुआ हिन्दू कांग्रेस की स्थापना करनी पड़ गई थी | यदि इसी दल के हाथ में देश की कमान रहती तो संभव है आज का संघ और भाजपा एक हिंदूवादी दल मात्र रह जाते बजाये एक मात्र कथित हिंदूवादी दल होने के | अब भाजपा मुसलमानों को रिझा रही है तो राहुल गांधी मंदिर जा रहे है | इन दोनों दलों के बीच में जनता और उसके मुद्दे पिस रहे है | लोग बेवकूफ बनते आ रहे है और अभी भी सिलसिला जारी है |
जिस तरह के वाट्सऐप पर मेसेज आते है की कुछ हिन्दू टैक्स बचाने को सरकार बदलने की सोच रहे है और उधर मुसलमान २०३५ में इस्लामिक देश बनाने की सोच रहे है | क्या मोदी या संघ इस होने वाले जन संख्या असंतुलन पर कोई योजना लेकर आये है ? नहीं कोई योजना नहीं है, जब आपके स्वयं के पास कोई योजना नहीं तो स्थान घेरे रहने के लिए क्यों समर्थन दिया जाए | आपके पास केवल एक योजना है अगला चुनाव जीतना और सत्ता पर लम्बे समय पर बने रहना | हिन्दू मुस्लिम से बढ़ कर और भी मुद्दे है देश में ये बात संघी कार्यकर्ताओ को समझना चाहिए | सरकार की गलत बात को गलत बोलना सीखना होगा संघियो को यदि संगठन को बचाना है वरना बस दलाली कर के अपना अपना घर चलाते रहे | २८ परसेंट टैक्स स्लैब लगाना भारत जैसे देश में बहुत ही घटिया हरकत रही जिसपर इस तरह के वाट्स एप के मैसेज फैला कर बचाव करना शर्मनाक है | राष्ट्रवाद में व्यापार सबसे मूलभूत विषय है और टैक्स का भार जनता पर कम रहे ये कैसे राष्ट्रवाद का मुद्दा नहीं रहा | चुनाव के समय फिर से राम मंदिर हिंदुत्व जैसे खेल खेले जायेंगे नए लोग भरोसा कर ले पुराने लोग तो नही करने वाले है | संघ ने और भाजपा के अन्दर भी यदि नेतृत्व परिवर्तन की आवाज़ नहीं उठी तो अगले कई दशको तक लोग हिंदुत्व की राजनीत पर न भरोसा करेंगे न ही लोगो के पास विकल्प होगा | ऐसे में नेतृत्व बदला जाए या विकल्प बनाए जाए, राष्ट्रवादी चिंतक जागरूक हो जाए....
Sunday, 8 October 2017
नोटबंदी के प्रमुख नुकसान
फेसबुक पर एक महोदय नोटबंदी के 3 फायदे नहीं गिना सके परन्तु १००
नुक्सान पूछने लगे | बाजार का हाल सब जानते है पर बेशर्मी कहे या विवेक शुन्यता
जहा लोग राष्ट्रहित को देश की आर्थिक समृधि से नहीं जोड़ पा रहे | मिडिया हिन्दू
मुस्लिम पर अटकाए है हम अटके है | नोटबंदी का केवल एक ध्येय था यू.पी चुनाव जीतना
| सपा बसपा जैसी पार्टियों को बर्बाद करना हुआ भी वही | पर मूल्य बहुत अधिक था
पुरे देश की अर्थव्यवस्था दांव पर लगा कर केवल अपने राजनितिक हित साधना मुझे तो
देश द्रोह से कम नहीं लगता | १५ लाख ४४००० करोड़ में १५ लाख २८ करोड़ वापस आगये और
गिनती अभी भी चल रही है | चलिए गिनते है नोटबंदी से हुए उन नुकसानों को जो आप सब
जानते है पर थोड़े ही बोलने को तैयार है |
१. अर्थव्यवस्था लम्बे
समय के लिए क्षतिग्रस्त हो गई | 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ 5.7% का जी.डी.पी जो
दिखा रहे है वो नए फार्मूले से पुराने से दिखाए तो जी.डी.पी 3-3.5% ही रह गई है |
२. लोगो का व्यापार एक
महीने पूरी तरह ही प्रभावित हो गया |
३. जनता का लाइन में
लगवा के समय बर्बाद करवाया |
४. बैंक कर्मचारियों का
अतिरिक्त समय लेकर समय बर्बाद करवाया |
५. लाइन में लग कर १००
से ऊपर लोग पुरे देश भर में लोग मारे गए जिनके लिए कोई संवेदना नहीं प्रकट की गई |
६. बैंको पर एन पी ए बढ़
गया जिस से बैंको को अपनी ब्याज दरे घटानी पड़ेगी |
७. बैंको ने बचत खातो
पर भी 4 प्रतिशत से घटाकर 3.5 प्रतिशत दर कर दी |
८. लोग भी लोन नही ले रहे
इस कारण बैंक अलग-2 प्रकार के फ़ालतू के सर्विस चार्ज वसूल रहे है |
९. उस निजी नोट कम्पनी
को अरबो का शुद्ध लाभ हुआ जिसको भारत सरकार के नोट छापने का ठेका मिला हुआ है |
१०. सारा काला धन सफ़ेद
हो गया | नोटबंदी से पैसा घूम गया भले वो 60:40 या 70:30 के अनुपात से लोगो ने घूमा
के किआ हो आखिरी समय तो 50:50 के अनुपात में घूमा | तो अब देश में काला धन तो रह
ही नहीं गया | १६००० करोड़ और उस से भी कम
काला धन माना जा सकता है पर इस से अधिक तो नोट छापने में लग गए |
११. लोगो का मुद्रा की अर्थव्यवस्था
से विश्वास हटा |
१२. पेटीएम का लाभ बढ़ा
उस समय अलीबाबा एक चीनी कम्पनी की हिस्सेदारी ४२ प्रतिशत थी अब ६२ प्रतिशत है |
अप्रत्यक्ष रूप से पेटीएम कर के उन लोगो ने चीन को लाभ दिया जो झालरों का बड़ा
विरोध करते थे |
१३. प्रधानमन्त्री बार
बार झूठ बोलते रहे | केवल पचास दिन और जिस चौराहे पर बुलायेंगे मैं आऊंगा ? क्या
जनता ही हालत सुधरी काला धन जो नष्ट होने की आशा थी वो नष्ट हुआ ? और नष्ट धन को
पुनः उत्पादित कर के जनता के हित में लाया गया ? नही
१४. कभी डिजिटल इंडिया
तो कभी काला धन बार-बार सरकार अपनी बात से पलटती रही | जनता को गुमराह करती रही |
१५. २००० का नया नोट
दौड़ा कर काला धन को रोकने का और तरीका बढ़ा दिया गया |
विस्तार से हर क्षेत्र के नुक्सान को लिख कर लेख
को बढ़ाया जा सकता है जिसकी आवयश्कता नहीं है | बाजार का हाल उन्हें पता है जो
बाजार में है | हमने एक चायवाले के हाथ में देश सौपा है जिसने सरकार में पार्टी के
कार्यो को चाय पार्टी बना दिया और जनता निरी मुर्ख पर मुर्ख बने रहने को तैयार है
|
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शिवकर बापूजी तलपदे जी ने गत २०० वर्षो में प्रथम विमान की रचना की और उसे उड़ा कर भी दिखाया | ये विषय आर्य समाज के लेखको ने तो लिखा पर...
