हम प्रातः कालीन मन्त्र, शयन कालीन मन्त्र और ईश्वरस्तुति प्रार्थना मन्त्र प्रस्तुत कर चुके है अब हम भोजन से पूर्व एवं पश्चात के प्रार्थना मन्त्र आपके समक्ष रखते है | इन २ मंत्रो को बालक-बालिकाओ को कंठस्थ कराये | कुछ विद्यालयों में शान्ति प्रार्थना मन्त्र भोजन पूर्व कराये जाते है वो हम सर्वप्रथम रखते है | ये शान्ति प्रार्थना उपनिषद मंत्र अति उत्तम है परन्तु यह भोजन मंत्र नहीं है | यजुर्वेद का भाष्य हम महर्षि दयानंद सरस्वती जी का प्रस्तुत कर रहे है | भोजन समाप्ति मंत्र का हम श्रीपाद दामोदर सतवालेकर जी का भाष्य प्रस्तुत कर रहे है |
अन्न्यते भगवान् ! हमे तुम अन्न सदा प्रदान करो,
अन्न दान करने वालो का प्रभो सदा कल्याण करो |
रोग रहित व पौष्टिक अन्न से ईश हमे बलवान करो,
दो पायो व चौपायो को अन्न सदा प्रदान करो |
नमस्ते , आप जैसे सत्यविद्या का प्रचार करने वाले है जिससे यह सत्य विद्या हम तक पहोचती है| और हमें सत्यविद्या का ज्यान प्राप्त होता है| आपका कोटि कोटि धन्यवाद| सुरेश चावड़ा, वैदिक महा सभा, राजकोट. गुजरात.
ReplyDeleteवैदिक संस्कृति सभी सभ्यताओं का मूल है
ReplyDeleteउसकी रक्षक करो तो वह हमारी रक्षा करेगी
ये मन्त्र भोजन के समय बोले जाना वाला नही है।
ReplyDeleteये तो पठन पाठन के समय का है ।