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Tuesday, 24 October 2017

भू-राजस्व में व्यापक सुधारों से न्यायिक सुधारो में क्रान्ति आएगी

हज़ारो हज़ार मामले न्यायलय में लंबित पड़े हुए है | अपराधिक मामलो से अधिकतर भूमि विवाद के विषय है | न्यायालय पर सरकार इसलिए ध्यान नही देती क्यों की उनसे उतनी कमाई नहीं है | जब की स्टैम्प ड्यूटी के नाम पर अच्छी कमाई करती है | ६-८% तक की स्टैम्प ड्यूटी उसके बाद 2 परसेंट की पर्ची काटने का शुल्क | कुछ हज़ार वकील का शुल्क इस प्रकार हर बार जब किसी भूमि का क्रय विक्रय होता है तो १० प्रतिशत से ऊपर का मूल्य उसका सरकार बढ़ा देती है | भूमि का स्थान तो वही रहना है मूल्य कागज़ पर बढ़ता रहता है, कारण सरकार की नीतिया जो की अंग्रेजो के समय से चली आरही है | जिस समय अंग्रेजो ने इसको लगाया था ऋषि दयानंद ने इसका विरोध किआ था | आज स्टैम्प ड्यूटी का विरोध करने वाला कोई है ही नही बड़ा आश्चर्य है |
मंहगाई का बड़ा कारण तो सरकार की नीतिया होती है जो की आम जन मानस का दिनों दिन जीना दुर्भर करती है |
सरकार स्टैम्प ड्यूटी हटा दे ये आशा करना तो बेकार है पर सुधार में बहुत से सुधार ऐसे है जिनको ला कर न्यायलय में आने वाले मामलो में भारी कमी की जा सकती है |
१. जैसे भू राजस्व की राज्य सरकारों की अपनी वेबसाईट बनी हुई है जिसमे खाता खतौनी की नकले निकाली जा सकती है | इसी प्रकार गूगल मैप से या इसरो के डाटाबेस से मिलाते हुए भूमि के मान चित्रों को भी आनलाइन किआ जाए | इस से उस तरह के बहिनामे रुकेंगे जहा भूमि की वर्तमान स्तिथि को कुछ और बतला के क्रय विक्रय की प्रक्रिया निगमित की जाती है |
2. पैसे के लेन देन पर अलग दस्तावेज बना कर रजिस्ट्री में साथ लगाने का नियम बना दे | जिस से बाद में पैसे के लेन दें को कोई विवाद न हो सके |
अधिकतर मामले यही आते है भूमि कुछ की कुछ कह के बेच दिया | इधर की उधर जमीन दिखा दी गई | पैसे के लेनदेन को भी विवाद उत्पन्न होता है | इसी प्रकार ऐसे सरल से नियम बना कर बाद में होने वाले विवादों को सरकार पूर्व ही समाप्त कर सकती है | यदि न्यायी विभाग में आपको और भर्ती नही करनी है हाल फिलहाल तो ये सबसे सरल तरीका है | नए मामले आने ही कम करवा दिए जाए | इसके साथ स्टैम्प ड्यूटी को 2 प्रतिशत से अधिक न रखा जाए तब जा के ये कुल सर्कल रेट का 5 प्रतिशत पड़ेगा |

Monday, 16 October 2017

क्या मोदी अमित शाह संघ को समाप्त कर देंगे ?

जो वर्षो से हिंदुत्व, श्री राम जन्म भूमि, गौ रक्षा आदि विषयों का समर्थन करते रहे है वे संघ के तौर तरीके कार्यशैली से परिचित है | संघ झूठ और अफवाह फैलाने को अपने तंत्र का हिस्सा मानता है | संघ द्वतीय विश्व युद्ध के उस दौर की मानसिकता से निकल नहीं पाया जहा हिटलर और चर्चिल दोनों ही अपनी अपनी जनता को झूठ परोसते थे | आज कैसे भी हो मोदी भी वही कार्यशैली अपनाए हुए है बस झूठ के आयाम बढ़ गए हैं | हम अपने आसपास देख कुछ रहे है और सरकारी आकडे कुछ और बोल रहे | वाट्सएप्प पर सिर्फ झूठ फैलाया जा रहा जिसे अब लोग समझने भी लगे है | जो कार्यशैली संघ ने अपने कार्यकर्ताओं को दी उसे सरकारी तंत्र पर प्रयोग कर के संघ और भाजपा स्वयं अपनी मुक्ति की ओर बढ़ रहे है |
हम कितना भी कोस ले संघ को पर ये सत्य है की हमें हिन्दुओ की हित की बात करने वाला एक संगठन चाहिए और बात ही नही कार्य करने वाला | भले संघ का योगदान रहा हो हिन्दू महासभा और आर्य समाज जैसे सशक्त राष्ट्रवादी हिन्दू संगठनों को निष्क्रिय करने और अभी भी बनाए रखने में पर अभी तो संघ ही है हमारे पास | मैं कितनी भी आलोचना कर लू जो के कार्यो के आधार पर ही होगी पर यही चाहूँगा की जिन विषयों पर इन्हें समर्थन मिलता आया है उन विषयों पर कार्य तो हो | भाजपा को जितना समय मिला उसने अपने स्तर पर भ्रष्टाचार किआ | निजी लाभ देने के मामले भी सामने आने लगे अमित शाह के पुत्र के रूप में |
देश में ही सिर्फ कुछ उद्योगपति ही लाभ उठा पा रहे है | मोदी और अमित शाह सत्ता के मद में चूर है आपको लगता है की आप पैसे के बल पर चुनाव जीत लेंगे | ये सूचना का युग है यहाँ झूठ चलता भी जाता है तो बहुत लम्बे समय तक नहीं चल सकता | आप जितना भी हिन्दू मुस्लिम कर ले आपको काम तो कर के देना ही पड़ता है | काम नहीं तो समर्थन नहीं |
भाजपा के अन्दर  कोई नेता बोलने को तैयार नहीं | पुराने सारे नेता किनारे लगा दिए गए | एक जसवंत सिन्हा जी ने साहस दिखाया | राम जेठमलानी को बाहर कर दिया गया | सुब्रमण्यम स्वामी ने मना किआ था जी.एस.टी लागू करने का सही समय नहीं | अरुण शौरी ने भी वक्तव्य दिए जो लोगो तक पहुच नहीं पाए | आडवानी जी तो राष्ट्रपति योग्य भी नहीं थे | दलित कार्ड का खेल राष्ट्रपति चुनाव में ही खेला गया | भारतीय जनता पार्टी के दो शीर्ष नेतृत्व मोदी और अमित शाह को ये लगता है की पैसा खर्च कर के गाव देहात के वोट खरीद सकते है | जबरदस्त प्रचार कर सकते है | शायद वे जीत जाए, शायद | पर ये बात राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के लिए और बुरी होगी |
एक तो संघ और भाजपा की बृहद विस्तार की नीव जिन लोगो ने डाली थी उन्हें बाहर कर दिया गया | कही कोई कुछ बोल नहीं सकता | वही कांग्रेस की तरह हाई कमान कल्चर भाजपा में आगया | चापलूसी करो और बने रहो विरोध किआ तो बाहर जाओ | संघ के विचारको को विचार करना चाहिए की किसको कमान सौप दी | पर यहाँ तो उल्टा ही हो रहा है | पहले भागवत जी कहते है आरक्षण की समीक्षा होनी चाहिए फिर प्रधानमंत्री ने बोल दिया की आरक्षण नहीं हटेगा अब श्री मोहन भागवत ने भी बोल दिया आरक्षण पिछडो का हक़ है | क्या संघ को भी अब मोदी ही नियंत्रित कर रहे है ?
कहा गया वो हिंदी भाषा को प्रधानता देने का मुद्दा ? गौ रक्षा के लिए एक विधेयक नही पेश हो सका ? अब गौ रक्षा विधेयक पास न हो ऐसा संभव ही नहीं है | राज्य सभा की सबसे बड़ी पार्टी आप की है | और कम से कम पेश तो हो पता तो हो कौन गौ रक्षा के विरोध में है | पर न ही हिंदुत्व के विषय पर कार्य हुआ न विकास के | बुलेट ट्रेन मतलब बड़ा सौदा और राजनीत में बड़ी डील मतलब बड़ा कमिशन होता है | पैसा बेहिसाब होगा भाजपा के पास हो सकता है कांग्रेस ये देख कर अपना भण्डार इस बार भी न खोले | पर भाजपा के अगले और दस साल के शासन का मतलब ये हुआ की उसके अगले 20-30 साल लोग इनके बारे में सोचेंगे भी नहीं | सिर्फ तुष्टिकरण न हो इसलिए इन दो लोगो को सत्ता दिए रहना तो बहुत भारी मूल्य है |
बांग्लादेशी विस्थापितों को बाहर करेंगे हल्ला करेंगे रोहिंग्या के मुद्दे पर अटक गए | अरे अवैध बंगलादेशियो के लिए ही आप कानून बना देते जो आई.एम.टी.डी कांग्रेस ने समाप्त किआ था | रोहिंग्या के विषय पर या भविष्य में ऐसे किसी भी शरणार्थीयो के विषय पर एक सरल सा कानून बना कर ही आप इस विषय को अदालत में जाने से रोक सकते थे या अदालत के फैसले को देश हित के पक्ष में कर सकते थे | संघ से बहुत से लोग असंतुष्ट थे जो हिंदुत्व की विचारधारा से सहमत थे | हिंदुत्व की विचारधारा कोई भिन्न विचारधारा नहीं है | ये भी वही सहिष्णुता की ही विचाधारा है | तिलक के कांग्रेस से बाहर होते ही कांग्रेस ने समय समय पर मुस्लिम तुष्टिकरण और हिन्दू विरोध को प्रमुखता से पकड़ लिया था जिस कारण हिन्दू महासभा जिसका मतलब हुआ हिन्दू कांग्रेस की स्थापना करनी पड़ गई थी | यदि इसी दल के हाथ में देश की कमान रहती तो संभव है आज का संघ और भाजपा एक हिंदूवादी दल मात्र रह जाते बजाये एक मात्र कथित हिंदूवादी दल होने के | अब भाजपा मुसलमानों को रिझा रही है तो राहुल गांधी मंदिर जा रहे है | इन दोनों दलों के बीच में जनता और उसके मुद्दे पिस रहे है | लोग बेवकूफ बनते आ रहे है और अभी भी सिलसिला जारी है |  
जिस तरह के वाट्सऐप पर मेसेज आते है की कुछ हिन्दू टैक्स बचाने को सरकार बदलने की सोच रहे है और उधर मुसलमान २०३५ में इस्लामिक देश बनाने की सोच रहे है | क्या मोदी या संघ इस होने वाले जन संख्या असंतुलन पर कोई योजना लेकर आये है ? नहीं कोई योजना नहीं है, जब आपके स्वयं के पास कोई योजना नहीं तो स्थान घेरे रहने के लिए क्यों समर्थन दिया जाए | आपके पास केवल एक योजना है अगला चुनाव जीतना और सत्ता पर लम्बे समय पर बने रहना | हिन्दू मुस्लिम से बढ़ कर और भी मुद्दे है देश में ये बात संघी कार्यकर्ताओ को समझना चाहिए | सरकार की गलत बात को गलत बोलना सीखना होगा संघियो को यदि संगठन को बचाना है वरना बस दलाली कर के अपना अपना घर चलाते रहे | २८ परसेंट टैक्स स्लैब लगाना भारत जैसे देश में बहुत ही घटिया हरकत रही जिसपर इस तरह के वाट्स एप के मैसेज फैला कर बचाव करना शर्मनाक है | राष्ट्रवाद में व्यापार सबसे मूलभूत विषय है और टैक्स का भार जनता पर कम रहे ये कैसे राष्ट्रवाद का मुद्दा नहीं रहा | चुनाव के समय फिर से राम मंदिर हिंदुत्व जैसे खेल खेले जायेंगे नए लोग भरोसा कर ले पुराने लोग तो नही करने वाले है | संघ ने और भाजपा के अन्दर भी यदि नेतृत्व परिवर्तन की आवाज़ नहीं उठी तो अगले कई दशको तक लोग हिंदुत्व की राजनीत पर न भरोसा करेंगे न ही लोगो के पास विकल्प होगा | ऐसे में नेतृत्व बदला जाए या विकल्प बनाए जाए, राष्ट्रवादी चिंतक जागरूक हो जाए....

Sunday, 8 October 2017

नोटबंदी के प्रमुख नुकसान

फेसबुक पर एक महोदय नोटबंदी के 3 फायदे नहीं गिना सके परन्तु १०० नुक्सान पूछने लगे | बाजार का हाल सब जानते है पर बेशर्मी कहे या विवेक शुन्यता जहा लोग राष्ट्रहित को देश की आर्थिक समृधि से नहीं जोड़ पा रहे | मिडिया हिन्दू मुस्लिम पर अटकाए है हम अटके है | नोटबंदी का केवल एक ध्येय था यू.पी चुनाव जीतना | सपा बसपा जैसी पार्टियों को बर्बाद करना हुआ भी वही | पर मूल्य बहुत अधिक था पुरे देश की अर्थव्यवस्था दांव पर लगा कर केवल अपने राजनितिक हित साधना मुझे तो देश द्रोह से कम नहीं लगता | १५ लाख ४४००० करोड़ में १५ लाख २८ करोड़ वापस आगये और गिनती अभी भी चल रही है | चलिए गिनते है नोटबंदी से हुए उन नुकसानों को जो आप सब जानते है पर थोड़े ही बोलने को तैयार है |
१.       अर्थव्यवस्था लम्बे समय के लिए क्षतिग्रस्त हो गई | 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ 5.7% का जी.डी.पी जो दिखा रहे है वो नए फार्मूले से पुराने से दिखाए तो जी.डी.पी 3-3.5% ही रह गई है |
२.       लोगो का व्यापार एक महीने पूरी तरह ही प्रभावित हो गया |
३.       जनता का लाइन में लगवा के समय बर्बाद करवाया |
४.       बैंक कर्मचारियों का अतिरिक्त समय लेकर समय बर्बाद करवाया |
५.       लाइन में लग कर १०० से ऊपर लोग पुरे देश भर में लोग मारे गए जिनके लिए कोई संवेदना नहीं प्रकट की गई |
६.       बैंको पर एन पी ए बढ़ गया जिस से बैंको को अपनी ब्याज दरे घटानी पड़ेगी |
७.       बैंको ने बचत खातो पर भी 4 प्रतिशत से घटाकर 3.5 प्रतिशत दर कर दी |
८.       लोग भी लोन नही ले रहे इस कारण बैंक अलग-2 प्रकार के फ़ालतू के सर्विस चार्ज वसूल रहे है |
९.       उस निजी नोट कम्पनी को अरबो का शुद्ध लाभ हुआ जिसको भारत सरकार के नोट छापने का ठेका मिला हुआ है |
१०.   सारा काला धन सफ़ेद हो गया | नोटबंदी से पैसा घूम गया भले वो 60:40 या 70:30 के अनुपात से लोगो ने घूमा के किआ हो आखिरी समय तो 50:50 के अनुपात में घूमा | तो अब देश में काला धन तो रह ही नहीं गया | १६०००  करोड़ और उस से भी कम काला धन माना जा सकता है पर इस से अधिक तो नोट छापने में लग गए |
११.   लोगो का मुद्रा की अर्थव्यवस्था से विश्वास हटा |
१२.   पेटीएम का लाभ बढ़ा उस समय अलीबाबा एक चीनी कम्पनी की हिस्सेदारी ४२ प्रतिशत थी अब ६२ प्रतिशत है | अप्रत्यक्ष रूप से पेटीएम कर के उन लोगो ने चीन को लाभ दिया जो झालरों का बड़ा विरोध करते थे |
१३.   प्रधानमन्त्री बार बार झूठ बोलते रहे | केवल पचास दिन और जिस चौराहे पर बुलायेंगे मैं आऊंगा ? क्या जनता ही हालत सुधरी काला धन जो नष्ट होने की आशा थी वो नष्ट हुआ ? और नष्ट धन को पुनः उत्पादित कर के जनता के हित में लाया गया ? नही
१४.   कभी डिजिटल इंडिया तो कभी काला धन बार-बार सरकार अपनी बात से पलटती रही | जनता को गुमराह करती रही |
१५.   २००० का नया नोट दौड़ा कर काला धन को रोकने का और तरीका बढ़ा दिया गया |

विस्तार से हर क्षेत्र के नुक्सान को लिख कर लेख को बढ़ाया जा सकता है जिसकी आवयश्कता नहीं है | बाजार का हाल उन्हें पता है जो बाजार में है | हमने एक चायवाले के हाथ में देश सौपा है जिसने सरकार में पार्टी के कार्यो को चाय पार्टी बना दिया और जनता निरी मुर्ख पर मुर्ख बने रहने को तैयार है |

Thursday, 3 August 2017

अमर होने का सूत्र

आप अमर होना चाहते है ? आप कहेंगे कौन अमृत्व को नही प्राप्त करना चाहता यदि अमरता स्वर्ग की प्राप्ति का स्थायित्व जैसी हो | समस्याओं के साथ तो कोई भी अमर नहीं होना चाहेगा | यदि मैं कहू कि अमर होना बड़ा सरल है तो आप यही कहेंगे कि ये संभव ही नहीं सरलता तो दूर कि बात है | अमरत्व क्या है इसे समझिये, इसी शरीर में रहते जब तक मानवजाति रहे कम से कम तब तक पृथ्वी पर बने रहने कि चाह कुछ लोगो कि उसके बाद भी इसका मूल अर्थ तो यही हुआ कि आपका D.N.A पृथ्वी पर बना रहे नष्ट न हो | D.N.A के अंदर समायोजित जींस आपके ज्ञान के संवाहक होते है तो अन्य भी तरीके है आपके ज्ञान को सुरक्षित रखने के |

१. पुस्तक लिखिए : पुस्तके मनुष्य को अमर कर देती है | व्यक्ति रहे न रहे उसके ज्ञान को पुस्तके   पीढ़ी दर पीढ़ी लोग पढ़ कर आगे बढाते हैं | सारे ऋषि मुनि इसी प्रकार तो अमर है | महर्षि दयानंद इसी प्रकार अमर हुए |आपका साहित्य नित्य ज्ञान पर होना चाहिए विद्या पर तभी आप पुस्तको के माध्यम से अमर हो पायेंगे |  अविद्या तो बदलती रहती है इसीलिए तो अविद्या है |

२. अविष्कार करिए : आपका अविश्कारिक ज्ञान आपको कुछ पीढियों के लिए तो अमरत्व दे ही देगा | लोग तब तक आपको याद करेंगे जब तक आपकी बनाई चीज़ का प्रयोग करेंगे | पर है ये अविद्या का मार्ग अतः बहुत लम्बा नहीं है फिर भी यदि आपके कार्य से कुछ परोपकार होना है मानवजाति का तो इस से उत्तम क्या है |
३. शिक्षक बनिए : कोई ऐसी शिक्षा दीजिये दुनिया को जिसके कारण आपकी बात पीढ़ी दर पीढ़ी लोग आगे कहते रहे | वैसे कहावते बनाने वाले घाघ भी इस प्रकार अमर ही माने जायेंगे और वेदों को श्रुति रूप में आगे बढाने वाले ऋषि भी |
४. उत्तम संतान उत्पन्न करिए : ऐसा करने पर आप पितृ ऋण से तो उबरेंगे ही साथ ही साथ आप अपने जींस को भी संरक्षित कर पायेंगे | इसीलिए स्त्री और पुरुष एक दुसरे के लिए अमरत्व का कारक है | परस्पर सम्मान और आदर के बिना कोई भी रह नहीं सकता मानव जाती हमारे सद्भाव पर ही टिकी है | ऐसे में नारीवाद के नाम पर पुरुष विरोध और पुरुष प्रधानता के नाम पर स्त्री पर हो रहे अत्याचार दोनों ही वसुतातः मानवजाति पर संकट है |
५. वास्तविक अमर हो जाइए : ये अथा पुरुषार्थ का मार्ग है | करोडो या अरबो में कोई एक मनुष्य ही इस सामर्थ्य को पाने का साहस कर पाता है | हनुमान जी देख लीजिये | इस शारीर को आप ४०० वर्ष तो आसानी से ठीक रख सकते है पर सहस्त्रो वर्ष रखने के लिए औषधिया ही पर्याप्त नहीं | शारीर को हाइबरनेशन कि स्तिथि में भी रखना पड़ेगा समय समय पर | सिद्धियों का भी प्रयोग करना पड़ेगा |
अमरत्व होने का अवसर विधाता ने केवल इसलिए दिया है ताकि इस शरीर का लक्ष्य प्राप्त किआ जा सके मुक्ति मोक्ष कि प्राप्ति कि जा सके | हम सबके प्रयास जाने अनजाने अमृत्व कि ओर ही होते है इस शरीर में अमरत्व कि अभिलाषा केवल इस ध्येय के कारण है कि  हम स्वछन्द हो कर ब्रह्माण्ड में भ्रमण कर सके उस परमानंद के संपर्क में रहते हुए | अतः कैवल्य कि स्तिथि कि प्राप्ति कि चेष्टा ही सर्वोत्तम है |

Wednesday, 7 June 2017

इसलिए किआ जा रहा खेती का सत्यानाश

भारत में अंग्रेजो के समय और उनके जाने के बाद केवल एक वर्ग और व्यवसाय ऐसा रहा जिसकी लगातार दुर्दशा कि जा रही है | वो है किसान, बिना किसी जाती धर्म के भेदभाव के खेती को हानि का व्यवसाय बना दिया गया | एक देश जो हजारो वर्षो से खेती यानी कृषि के कारण ही समृद्ध था सारे अन्य व्यवसाय इसी कारण चलते थे आखिर ऐसा क्या बिगाड़ा इस व्यवसाय और वर्ग ने कि सरकार बुरी तरह इसे नष्ट करने पर अमादा है | तो अंग्रेजो के समय से यदि चिन्तन करे | किसानो पर अत्याधिक लगान क्यों कि किसान ही वो वर्ग था बहुतायत में जिसपर शासन किआ जाना था बनिया/व्यापारी तो हवा के साथ रुख मोड़ लेता है | बंगाल में अंग्रेजो ने अपनी नीतियों के कारण भुखमरी खड़ी कर दी | अंग्रेज गये नेहरु काल आया, तकनीक प्रद्योगिकी पर ध्यान दिया गया पर कृषि कि अवहेलना हुई | अनाज अमेरिका से आता था नेहरु के बाद शास्त्री जी आये जिन्होंने कृषि पर ध्यान दिया परिणाम ये हुआ कि डॉलर का मूल्य भी गिरा और देश में अनाज का उत्पादन भी |
शास्त्री जी मरवा दिए गये, औद्योगिक तीव्रता के युग में किसानो के हित कि बात करने वाला अधिक समय कहा रहना था | 
यद्दपि भारतीय खाद्यान निगम शास्त्री जी के आने से पूर्व ही स्थापित हो चूका था | पर इसकी कार्य पद्धति किसान हित कि नही दिखती | किसानो के उत्पादन का मूल्य यही लगाती है धान गेहू कि खरीद भी करती है | गोदामों में अनाज सड़ता है बाद में शराब कम्पनियों को सस्ते दाम में बेचा जाता है | किसान भी दलालों के माध्यम से ही बेचता है अपना अनाज | अंग्रेजो के समय का नियम ही चला आरहा है अनाज का मूल्याकन करने का | ३६००० कर्मचारियों को लेकर ये संस्था किसानो का किस प्रकार हित कर रही है | अब तो सट्टा बाजार में भी अनाज का मूल्य पहुच गया है | खैर ये तो सब जानते है कि खेती और किसान कि हालत खराब है लोग खेती छोड़ रहे | कम्प्यूटर पर बैठ कर कुछ घंटो में हम हजारो लाखो बना लेते है तो भला कडकती धुप में कौन महेनत करे | गावो में अब कूलर पंखे पहुच गए है पेड़ कम हो गए है किसान भी अब उतनी मेहेनत नही कर पाता | आज से कुछ वर्ष पूर्व १०० किलो का बोरा चलता था अब ४५ से ६५ किलो के ही पैकेट चलते है | यूरिया डी.ए.पी से हम बाहर न आ पाए ना आना चाहते है | नरेगा में भी घर बैठे किसानो को पैसा मिल जाता है फिर घाटे के धंधे में कौन हाथ डालना चाहेगा |
पर बड़ा रहस्य क्या है इसके पिछले | तो षड्यंत्र ये है कि भारत कि कृषि भूमि है लगभग ७० लाख हेक्टेयर जिसे लगातार विकास के नाम पर सडक और हाइवे बनाने के नाम पर, औद्योगिक विकास के नाम पर हडपा जा रहा है | वही अमेरिका में कुल कृषि योग्य भूमि है १० लाख १४ हजार हेक्टेयर | भारत का क्षेत्रफललगभग 32 लाख ८७ हजार वर्ग किलोमीटर  वही अमेरिका का कुल क्षेत्रफल है ९८ लाख ३४ हजार वर्ग किलोमीटर है | भारत कि कृषि योग्य भूमि ७० लाख वर्ग किलोमीटर वही अमेरिका कि कृषि योग्य भूमि १ लाख १४ हजार वर्ग किलो मीटर यानी कि क्षेत्रफल भारत से तीगुने से अधिक | भारत कि जनसँख्या १ अरब ३१ करोड़ अमेरिका कि जनसँख्या ३२ करोड़ अब विचारे कि अमेरिका विश्व के प्रति क्या कर्तव्य निभा रहा है | अपनी भूमि सम्हाल के रखे हुए है न खेती करता है न करने देता है | कहने को विश्व के अनाज का मूल्य नियंत्रण में रखना पर षड्यंत्र आपके मुह का निवाला नियंत्रित करने का है | हम उद्योगों और विकास के नाम पर अपनी खेती बर्बाद कर रहे | जिनके पास जमीन है वो खेती कर नहीं रहे उद्योग कर रहे है जिनके पास कृषि योग्य भूमि है वो खेती पर ध्यान नही दे रहे और उद्योग उद्योग कर रहे है | खेती से उत्तम कोई उद्योग नहीं | जब आपकी जमीने खराब हो जाएगी तब अमेरिका से अनाज आया करेगा पुराने दिनों कि तरह और आप मु मांगे दाम पर गेहू खरीदेंगे |
समाधान
बड़ा सरल सा समाधान है किसान और गाये को जोडीये | अगले ५ वर्षो में पुरे देश में यूरिया डी.ए.पी बंद करवाइए | जैविक खेती को अनिवार्य कर दीजिये | जिला स्तर पर अनाज का मूल्य निर्धारण करने के कि निति अपनाइए | अनाज बैंको कि स्थापना करवाइए | फसल चक्र को पुनः आरम्भ करवाइए | ए.सी में बैठे या कृषि विज्ञान से एम एस सी पी एच दी करने वाले उन्हें कृषि सिखाते है जो बचपन से ही खेती करते आते है | जिन्होंने कभी खेत में पसीना नहीं बहाया वे किसानो का भला नही कर पायेंगे | कृषि सम्बंधित बाजार खरबों डोलर का है १ कि चीज़ पैक कर के १००० कि बेचीं जाती है | धान कि फसल के विकल्प पर कार्य करवाए |
परन्तु सरकार तो अब पशुओ के बाजार को कोर्पोरेट घरानों के लिए खोल रही है |  आने वाले टाइम में किसान जानवर को बाँध भी नही पायेगा | मध्य प्रदेश महाराष्ट्र में किसान अब आंदोलित हो रहे है | सरकार कुछ समय बाद कोई झुनझुना पकड़ा देगी | ये हमें निर्धारित करना है कि जिस देश में ३-४ फसले होती है जो दुनिया में कही नहीं होती उस कृषि प्रधान देश को उपजाऊ भूमि को बंजर कर के औद्योगिक देश तैयार करना है | सरकार में बैठे लोग सिर्फ पियादे है उनकि केवल एक मंशा है सत्ता में लम्बे समय तक रहना | हर चीज़ का व्यवसायीकरण, जनता केवल कमा के टैक्स भरने के लिए है और किसान श्रम एवं आत्म हत्या करने के लिए | मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में चल रहे किसान आन्दोलन को कितनी मिडिया कवर कर रही है | ईस्ट इंडिया कंपनी और अंग्रेजो ने हमें जिस प्रकार गुलाम बनाया वर्तमान कि लोकतांत्रिक सरकारे उन्ही तरीको का परिस्कृत रूप है |

Monday, 5 June 2017

दैनिक जीवन में वेद मन्त्र

भोजन से पूर्व एवं पश्चात के प्रार्थना वेद मन्त्र

हम प्रातः कालीन मन्त्र, शयन कालीन मन्त्र और ईश्वरस्तुति प्रार्थना मन्त्र प्रस्तुत कर चुके है अब हम भोजन से पूर्व एवं पश्चात के प्रार्थना मन्त्र आपके समक्ष रखते है | इन २ मंत्रो को बालक-बालिकाओ को कंठस्थ कराये | कुछ विद्यालयों में शान्ति प्रार्थना मन्त्र भोजन पूर्व कराये जाते है वो हम सर्वप्रथम रखते है | ये शान्ति प्रार्थना उपनिषद मंत्र अति उत्तम है परन्तु यह भोजन मंत्र नहीं है | यजुर्वेद का भाष्य हम महर्षि दयानंद सरस्वती जी का प्रस्तुत कर रहे है | भोजन समाप्ति मंत्र का हम श्रीपाद दामोदर सतवालेकर जी का भाष्य प्रस्तुत कर रहे है |


अन्न्यते भगवान् ! हमे तुम अन्न सदा प्रदान करो,
अन्न दान करने वालो का प्रभो सदा कल्याण करो |
रोग रहित व पौष्टिक अन्न से ईश हमे बलवान करो,
दो पायो व चौपायो को अन्न सदा प्रदान करो |


Wednesday, 10 May 2017

सुब्रमण्यम स्वामी रहस्यमयी, हिंदूवादी या परिपूर्ण व्यक्तित्व

पंद्रह सितम्बर १९३९ को चेन्नई, तमिलनाडू में एक ब्राह्मण परिवार में जन्मे सुब्रमण्यम स्वामी भारतीय राजनीत के सबसे अनोखे चेहरे है | जब भी लोग मान्यनीय प्रधानमन्त्री मोदी जी की आर्थिक नीतियों की आलोचना करते है तो सहमत होने वाले लोग भी कहते है की विकल्प क्या है |  डा. स्वामी प्रधानमन्त्री पद के एक अच्छे विकल्प तो है परन्तु उनका स्वयं का निजी जीवन उन कट्टर हिन्दू युवाओं के लिए विचारणीय है जिन्होंने दिन रात मोदी मोदी कर के उन्हें प्रधानमंत्री बनाया | जानते है सुब्रमण्यम स्वामी के बारे में :-

1. दिल्ली विश्वविद्यालय से गणित में स्नातक व हावर्ड से पी एच डी करने वाले डा. स्वामी हावर्ड में विसिटिंग प्रोफेसर रह चुके है |
२. आप १९९०-९१ वाणिज्य, विधि एवं न्याय मंत्री भी रह चुके हैं |
३. राजीव गांधी के करीबी माने जाने वाले डा. स्वामी ही थे जिन्होंने १९९८ में श्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार गिरवाई थी |
४. २ जी घोटाले को सबके सामने लाने वाले डा. सुब्रह्मण्यं स्वामी ही थे |
५. तमिलनाडू में कोई भी पुजारी बन सकता है आल कास्ट प्रीस्ट बिल को रुकवाने वाले डा. स्वामी थे |
६. नैशनल हैरल्ड केस को भी डा. स्वामी जनता के सामने लाये थे |
७. डा. स्वामी की पत्नी रोक्सेना स्वामी पारसी है |
८. डा. स्वामी की दो बेटिया है गीतांजली स्वामी और सुहासिनी हैदर, गीतांजली स्वामी डा.संजय शर्मा से विवाहित है जो की मैसच्यूसेट्स इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलोजी में प्रोफेसर है और एक आई ए एस के लड़के है | वही सुहासिनी हैदर टी वी संवादाता है जो की नदीम हैदर से विवाहित है | नदीम हैदर आई ऍफ़ एस अधिकारी (विदेश सेवा) सलमान हैदर के पुत्र है जिन्होंने स्वयं रंगमंच की कलाकार कुसुम से विवाह किआ था | (अब भक्त पीढ़ी दर पीढ़ी इसे लव जिहाद का नाम न देने लग जाए |)
९. जी पी को दिए वचन के कारण जनता पार्टी चला रहे ऐसा कहने के बाद ११ अगस्त २०१३ को जनता पार्टी का विलय हो ही गया |
१०. भले ही बी जे पी के नेता डरते हो परन्तु २६ अप्रैल २०१६ को स्वामी का कोई भी विरोध का स्वर न आने पर उन्हें राज्य सभा की सदस्यता दे ही दी गई | अब मोदी जी और राजनाथ सिंह डा. स्वामी को राजनीत तो सिखा नहीं सकते |
११. कैलाश मानसरोवर यात्रा का मार्ग आपने खुलवाया |
१२. चाईनीस भाषा के आप अच्छे जानकार है और वहा की आर्थिक नीतियों के भी |
स्वर्गीय सुश्री जय ललिता को जेल भिजवाना हुआ या किसी मुस्लिम युवक की पुलिस हवालात में मृत्यु होने पर धरने पर बैठना, ई वी एम में टैम्पेरिंग इत्यादि विषयों को डा. स्वामी ने ही चलाया |
अन्तराष्ट्रीय विषयों में ही नहीं अन्तराष्ट्रीय व्यापार के विषय भी आप अच्छे जानकार है | बस आपको कभी स्वदेशी की बात करते नहीं पाया | हाला की जनता पार्टी के लोगो में किसान हल लिए हुए था पर वो था |
हम लोगो को उनके कार्यो से ही जान सकते है उनकी बातो से नहीं | मोदी जी हो या डा. स्वामी, और सुब्रमण्यम स्वामी ने कार्य तो किआ ही है | वे अपने निजी जीवन में क्या करते है उनका भाई क्या मानता है, पत्नी और बेटी क्या मानती है ये निजी विषय है | हाला की ये निजी तब भी होता है जब कोई हिन्दू लड़की किसी और संप्रदाय में अपने मन का जीवन साथी चुनती है | भले ही बहला फुसला के या लक्षित हो कर फसी हो पर है तो ये उसका अपना निर्णय | 
क्या भारत की जनता कोई सहासी राजा और त्यागी तपस्वी मंत्री पा सकेगी | क्या हम चन्द्रगुप्त जैसे वीर राजा और चाणक्य जैसे प्रधानमन्त्री को पाने के लिए तैयार है | हम तो सिर्फ शब्दों पर मोह जाने वाले स्वभाव की भीड़ मात्र है | अत्याधिक कट्टरता सदैव हमारे विवेक को प्रभावित करती आई है और इसी का लाभ राजनितिज्ञो ने लिया है |

Wednesday, 3 May 2017

बाहुबली के सफल प्रयोग से बोलीवुड की रणनीति बदल सकती है

दक्षिण भारत की फिल्मे बोलीवुड की फिल्मो से हज़ार गुना बेहतर होती रही है | हिंदी फिल्मो में उनका मजाक उडाना या अन्य माध्यमो से उनका डर ही है क्यों की दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग न केवल हमारी सभ्यता परम्पराओं का निर्वहन परदे पर उकेर कर कर रहा है अपितु बहुत ही लाभदायक व्यवसाय भी करती है | इसके विपरीत बोलीवुड में इस्लामीकरण से लेकर अश्लीलता जम कर परोसी जाती है | इतने महान राजाओं का देश होने पर भी आप स्वयं विचारे की शाहजहाँ और अकबर पर कितनी बार फिल्मे बन गई पर महाराणा प्रताप और वीर शिवा जी पर कोई फिल्म निर्माता फिल्म बनाने को आगे नहीं आया और भारतीय इतिहास तो भरा पड़ा है राजाओं की महान कहानियों से |



यूरोप से बल अश्व शक्ति की तुलना में आया पर भारत में राजाओ का बल हाथियों की तुलना से किआ जाता था | महाराज पृथ्वीराज चौहान के लिए बीस हाथियों का बल कहा जाता था | ये सामान्य बात थी और विज्ञान की दृष्टि से भी सारी मांसपेशीया एक साथ कार्य करे तो इतना बल सृजित हो सकता है | ऐसे में बाहुबली जैसे राजाओ का तो अम्बार है | दक्षिण में अनेको अच्छी फिल्मे पूर्व में बनी है मगधीरा, चेन्नई वर्सेज चाइना, लिंगा इत्यादि इसके अतिरिक्त बोलीवुड तो रीमेक करता है दक्षिण की फिल्मो का | बाहुबली जैसी साफ़ सुथरी फिल्म की अपार सफलता से बोलीवुड को दिशा देने वाले रणनीतिकारो की नीतिया बदल सकती है | अब फिल्मे प्राचीन राजाओ पर बनाना आरम्भ हो सकती है क्यों की अधिकतर क्षेत्र में अधिकतर लोग भेडचाल ही चलते है | ऐसे में वे इतिहास का सत्यानाश ही करेंगे | इस बात में तो निश्चिंत हो जाइए की यदि बोलीवुड में कुछ निर्मित हो रहा है तो अधिक सम्भावना है की वे उस इतिहास को ऐसा दिखायेंगे की लोगो की दृष्टि में भारतीय राजाओ की कमजोरी ही सामने आएगी | बाजी राव पेशवा जैसा महावीर शूरवीर जिसके यूरोप और अमेरिका में उदाहरण दिए जाते है नेटिव अमेरिका में एक योद्धा हुआ टेकुश्मेह उसकी रफ़्तार को बाजीराव के आस पास कहा जाता था | उसी के कारण अंग्रेज वाईट हाउस जला पाए थे |

तो अब भारतीय जनता को जागरूक और सावधान रहने की आवयश्कता है | ऐसा तो होने वाला नहीं की यकायक पाकिस्तान और मिडल ईस्ट का पैसा लगना बंद हो जाए | पैसा आएगा, समाज में वे अपना सन्देश देते रहेंगे बस तरीका बदल देंगे | बोलीवुड वैसे भी प्रयोगशाला ही बना हुआ है | इस लिए जो शुद्धता अभी बनी हुई है दक्षिण भारत की फिल्मो में उसे बचाए रखने के लिए बोलीवुड की परछाई दूर ही रखनी होगी | और जनता का रुझान जिस दिशा में आगे बढ़ा है वो उसी विवेकशीलता के साथ आगे बढे | आगे रामायण, महाभारत जैसे महाग्रंथो पर भी फिल्मे बनेगी और महान राजाओं पर भी पर ये ध्यान हमें रखना है की इतिहास के साथ कोई छेड़छाड़ न होने पाए | माहिष्मती राज्य महाभारत काल में था और भारतीय जनता को भारतीय राजनितिक व्यवस्था की क ख ग भी नहीं पता है | पता भी कैसे हो कभी बताया ही नहीं गया हमारे लिए तो लोकतंत्र अंग्रेजो का दिया है | हमें तो कतार में लड़ना भी नहीं आता था जब की व्यूह रचना बनाकर हमारी लड़ाइया होती रही हमारे ग्रन्थ ये स्पष्ट बताते है | पर जिस प्रकार इतिहास करो ने पश्चिम की रोटी खा कर लिखा है वो बदलने का समय आगया है | और भारतीय इतिहास के ग्रंथो को महत्व देते हुए जागरूकता के साथ बाहुबली और वो सभी फिल्मे जिनसे समाज को अच्छा सन्देश जाए उनका स्वागत करना होगा | विपरीत सन्देश देने वाली फिल्मो का विरोध करना होगा |

Saturday, 29 April 2017

मगध साम्राज्य का खज़ाना जिस से कई विश्व बैंक ख़रीदे जा सकते हैं

मगध साम्राज्य का खज़ाना जिस से कई विश्व बैंक ख़रीदे जा सकते हैं
हर्यका वंश के शासक बिम्बसार ने मगध साम्राज्य का बड़ा विस्तार किआ | बिम्बसार के तीन रानिया थी आपकी पहली पत्नी कोसला देवी थी आपके जुड़ने से काशी दहेज़ में मिल गया मगध साम्राज्य को | आपकी दूसरी पत्नी छलना थी जो लिच्छवी साम्राज्य के राजा चेतक की पुत्री थी | आपकी तीसरी पत्नी क्षेमा थी जो माद्र वंश की थी जो पंजाब से थी | जर्मन इंडोलोजिस्ट हरमन जैकोबी का मानना था की महावीर वर्धमान की माता त्रिशाला चेतक की पुत्री थी | इस प्रकार से महावीर वर्धमान और आजातशत्रु आपस में मौसेरे भाई हुए | देवदत्त जो भगवान् बुद्ध का चचेरा भाई था आजातशत्रु का मामा था वो भड़काता रहता था आजातशत्रु को | इसमें सांप्रदायिक मान्यताओ का भी बड़ा योगदान रहा है आजातशत्रु वैष्णव था और बिम्बसार जैन और बौद्ध मत की ओर प्रभावित थे देवदत्त का पक्ष यही था की बिम्बसार सारी सम्पत्ति बौद्ध मत में लुटा देगा | देखा जाए तो हुआ भी यही पर बिम्बसार ये कार्य न कर सका तो सम्राट अशोक ने किआ | वो बौद्ध प्रभाव कुछ सौ वर्ष बाद पड़ा और देश की वैज्ञानिक उन्नति में हानि हुई, सेना की हानि हुई और धन की हानि हुई |
आजातशत्रु ने राज्य के लालच में बिम्बसार को बंदी बना लिया | इस कृत्य से उसकी माँ ने और बिम्बसार ने जैन मुनि भैर्द्व को ये विशाल खजाना दान में दे दिया जो एक गुफा में छुपा दिया गया भला तपस्वियों को धन की क्या पड़ी | ये गुफा पहाडो को काट कर बनाई हुई है | आज ये नालंदा जनपद के राजगीर स्थान में पड़ती है | इसको जरासंध का खजाना भी कहा जाता है संभव है ये राजकोष जरासंध के समय से ही आगे बढ़ा चला आरहा हो | वैसे भी यदि श्री पुरुषोत्तम नागेश जी के इतिहास संशोधन और बुद्ध के काल में ८०० वर्ष का दोष माने तो ये लगभग १४०० ईसा पूर्व का काल हुआ जो की महाभारत काल से मात्र १६-१७०० वर्ष ही दूर का काल था यानी इतने समय तक एक खजाने को कोई राज्य बचाए रख सकता है |
सोन भण्डार गुफा में पहला कक्ष ही सैनिको का कक्ष है | १०.४ मीटर लम्बा ५.२ मीटर चौड़ा और १.५ मीटर उचा ये कक्ष है | 
ऊपर बायीं ओर नीचे दाई ओर का दृश्य

इसके आगे खजाने का दरवाजा है पर वो आज तक कोई खोल नही पाया है | लोगो का ये भी कहना है कि खजाने तक पहुचने के लिए वैभवगिरी पर्वत सागर से होकर सप्तपर्णी गुफाओ तक जाता है, जो कि सोन भंडार गुफा के दुसरी तरफ़ तक पहुँचती है । कोई आश्चर्य नहीं गुफाये बहुत विस्तृत होती है दूसरा छोर तो होता ही है |

गुफा की दीवार पर शंख लिपि में लिखा हुआ है लोग इसे दरवाजा खोलने का कूट यानी कोड मानते है | शंख लिपि अब लुप्त हो चुकी है, बख्तियार खिलजी ने ११९३ ई. में नालंदा विश्विद्यालय एवं उसका पुस्तकालय नष्ट कर दिया जिसके कारण शंख लिपि के अध्यन से जुड़े सारे ग्रन्थ जल के राख हो गए | अब कोई विद्वान् बचा नहीं इस लिपि को पढने वाला | पर यदि ये कूट अब नहीं पढ़ सकते तो आजातशत्रु क्यों न पढ़ सका ? या तो ये कूट बहुत बाद में लिखा गया होगा |


आजातशत्रु विभिन्न यातनाये देता था अपने बाप को पर जब स्वयं पिता बना तो उसके विचार बदले और उस दिन वो उन्हें मुक्त करने जा रहा था | पर उसके आने की खबर सुन कर बिम्बसार ने हीरा चाट लिया | बिम्बसार जहा बंदी रहे और जरासंध का आखाडा सब पास पास ही है | मुगलों ने प्रयास किआ अंग्रेजो ने तोपे चलाई पर दरवाजा नहीं खुला | जगदीश चन्द्र बोस से राय ली गई डाईनामाईट से उड़ाने की तो उन्होंने कहा की यदि इसे उड़ाया गया तो इसका प्रभाव भूगर्भ तक जा सकता है लावा भी बाहर आसकता है |

 आज ये बिहार में पर्यटन का केंद्र है | पर यदि भारत सरकार चाहे तो आधुनिक तकनीक से बिना कोई तोड़फोड़ के अंदर क्या है अब पता किआ जा सकता है | इस बात का अनुमान किआ जा सकता है के मगध साम्राज्य के खजाने से विश्व बैंक का कर्ज तो सब चुक ही जाएगा पूरी दुनिया को कर्जा बाटा जा सकता है |

Wednesday, 19 April 2017

संयम एवं स्नान के समय के लिए अघमर्षण मन्त्र

भीष्म पितामह से मृत्यु शय्या पर जब पांडव उनके ब्रह्मचर्य के बल का कारण पूछते है तब वे इसी मन्त्र का उपदेश देते है | स्नान करते समय इस मन्त्र के पाठ से संयम में वृद्धि होती हैं |


Tuesday, 11 April 2017

आर्य समाज के दस नियमो का वैदिक आधार

आर्य समाज के दस नियम
1. सब सत्यविद्या और जो पदार्थ विद्या से जाने जाते हैं, उन सबका आदिमूल परमेश्वर है।

2. ईश्वर सच्चिदानंदस्वरूप, निराकार, सर्वशक्तिमान, न्यायकारी, दयालु, अजन्मा, अनंत, निर्विकार, अनादि, अनुपम, सर्वाधार, सर्वेश्वर, सर्वव्यापक, सर्वांतर्यामी, अजर, अमर, अभय, नित्य, पवित्र और सृष्टिकर्ता है, उसी की उपासना करने योग्य है।

3. वेद सब सत्यविद्याओं का पुस्तक है। वेद का पढना – पढाना और सुनना – सुनाना सब आर्यों का परम धर्म है।

4. सत्य के ग्रहण करने और असत्य के छोडने में सर्वदा उद्यत रहना चाहिये।

5. सब काम धर्मानुसार, अर्थात सत्य और असत्य को विचार करके करने चाहियें।

6. संसार का उपकार करना इस समाज का मुख्य उद्देश्य है, अर्थात शारीरिक, आत्मिक और सामाजिक उन्नति करना।

7. सबसे प्रीतिपूर्वक, धर्मानुसार, यथायोग्य वर्तना चाहिये।

8. अविद्या का नाश और विद्या की वृद्धि करनी चाहिये।

9. प्रत्येक को अपनी ही उन्नति से संतुष्ट न रहना चाहिये, किंतु सब की उन्नति में अपनी उन्नति समझनी चाहिये।

10. सब मनुष्यों को सामाजिक, सर्वहितकारी, नियम पालने में परतंत्र रहना चाहिये और प्रत्येक हितकारी नियम पालने सब स्वतंत्र रहें।

संघठन सूक्त

ओ३म्सं समिधवसे वृषन्नग्ने विश्वान्यर्य |
इड़स्पदे समिधुवसे नो वसुन्या भर                            |
         हे प्रभो ! तुम शक्तिशाली हो बनाते सृष्टि को ||
        
वेद सब गाते तुम्हें हैं कीजिए धन वृष्टि को ||
ओ३म सगंच्छध्वं सं वदध्वम् सं वो मनांसि जानतामं | 
देवा भागं यथा पूर्वे सं जानानां उपासते               |
       प्रेम से मिल कर चलो बोलो सभी ज्ञानी बनो | 
      
पूर्वजों की भांति तुम कर्त्तव्य के मानी बनो ||
समानो मन्त्र:समिति समानी समानं मन: सह चित्त्मेषाम् |
समानं मन्त्रमभिमन्त्रये : समानेन वो हविषा जुहोमि    ||
      हों विचार समान सब के चित्त मन सब एक हों |
    
ज्ञान देता हूँ बराबर भोग्य पा सब नेक हो ||
ओ३म समानी आकूति: समाना ह्र्दयानी : |
समानमस्तु वो मनो यथा : सुसहासति             ||
     हों सभी के मन तथा संकल्प अविरोधी सदा |
   
मन भरे हो प्रेम से जिससे बढे सुख सम्पदा ||



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