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Sunday, 26 January 2025

क्या अंग्रेज भारत वापस आ सकते है ?

 क्या हमे लीस पर आजादी मिली ? क्या 100 वर्ष बाद यानि 2047 मे अंग्रेज भारत मे वापस आजाएंगे ? जब 15 अगस्त को अग्रेज भारत छोड़ के गए तो फिर 26 जनवरी महत्वपूर्ण क्यों है ?

आज के वीडियो मे हम इन्ही प्रश्नों के उत्तर को जानेंगे |

यह बात सत्य है की 15 अगस्त 1947 को सत्ता का हस्तांतरण हुआ था | गोरे अंग्रेजों से काले अंग्रेजों ने सत्ता सम्हाल ली | भारत को आजादी इंग्लैंड की संसद मे इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट, 2047 नामक कानून बना के मिली |

तो क्या अंग्रेज उस कानून को निरस्त कर देंगे तो भारत पुनः गुलाम हो जाएगा ?

इसके उत्तर को समझने के लिए हमे इंडियन इंडेपेन्डेन्स एक्ट को समझना होगा | 4 जुलाई 1947 को इंग्लैंड के निचले सदन हाउस आफ कामन्स मे कोमॉनस प्रस्तुत हुआ | वहा से पास हो के, वहा के उच्च सदन, हाउस आफ लॉर्ड्स मे 15 जुलाई 1947 मे प्रस्तुत किया गया |

दिनांक 18 जुलाई 1947 को यह प्रस्ताव पारित हो गया |

जिसके अनुसार 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान नाम ब्रिटेन के दो उपगणराज्य निर्मित होंगे |

कैबिनेट मिशन प्लान के अंतर्गत नवंबर 1946 को संविधान सभा की योजना लाई जाती है और

दिनांक 6 दिसंबर 1946 को आधिकारिक तौर पर गठित की जाती है | 9 दिसंबर 1946 को इसकी आधिकारिक बैठक होती है |

26 नवंबर 1949 को संविधान, सभा द्वारा पूर्ण हो जाता है

इसके आर्टिकल 5 6 7 8 9 60 324 366 367 379 380 388 391 392 393 294 तुरंत प्रभावी हो जाते है बाकी 26 जनवरी 1950 से उसे प्रभावी किया जाता है |

24 जनवरी 1950 को संविधान की प्रति पर हस्ताक्षर किए जाते है

 

और अब आते है की हमारे पहले प्रश्न पर 26 जनवरी ही क्यों ?

15 अगस्त से प्रभावी करते तो एक छुट्टी बचती

तो इसके लिए भी अभी हमे फिर पीछे चलना पड़ेगा |

गवर्मेंट आफ इंडिया एक्ट 1919 की समीक्षा के लिए साइमन कमीशन नवंबर 1927 मे आया था |

जी हाँ, वही साइमन कमीशन जिसके विरोध करते हुए लाला लाजपत राय की जान गई थी उनका बदला लेने के लिए भगत सिंह राजगुरु सुखदेव ने अपना बलिदान दिया और वही साइमन कमीशन जिसका स्वागत करने वालों मे अंबेडकर अग्रणी था |

भारत मे संवैधानिक सुधारो के लिए आए आयोग मे भारतीय ही नहीं थे इसका विरोध तो होना ही था | यह एक प्रकार की भारतीयों के मुह पर तमाचा था की भारतीय स्वयं अपना देश सम्हालने योग्य नहीं | इस से पूर्व भारत के सेक्रेटरी आफ स्टेट लार्ड बिरकिनहेड ने चुनौती दी थी, की भारतीयों को अपना स्वयं का संविधान प्रस्तुत करने दो, जो सबके लिए समानता के समझौते पर आधारित होगा |

साइमन कमीशन के आने पर इस चुनौती को गंभीरता से लिया गया | दिसंबर 1927 के कांग्रेस के मद्रास अधिवेशन मे साइमन के विरोध के अलावा भारत के संविधान निर्माण करने पर सहमति बनी | इसके लिए सभी राजनीतिक दलों की बैठक 19 मई 1928 को गठित की गई | जिसमे नए संविधान के निर्माण के लिए समिति गठित की गई, जिसके चेयरमैन मोतीलाल नेहरू और सचिव जवाहर लाल नेहरू थे, इसमे अली इमाम, तेज बहादुर, सप्रू, सुभाष चंद्र बोस, एम आर जयकर एवं एनी बीसेंट भी थी | जिसकी रिपोर्ट अगस्त 1929 तैयार हो गई | जिसे नेहरू रिपोर्ट भी कहते है |

ये संविधान विधिक तरीके से लिखा गया था जिसमे 22 अध्याय और 87 लेख थे परंतु भारत को ब्रिटेन का उपगणराज्य ही बनाने का प्रस्ताव था |

इस संविधान मे मुस्लिम जहा अल्पसंख्यक है उनके लिए विधान मण्डल मे सीटे आरक्षित करने का प्रावधान था | मुस्लिमो के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र का प्रावधान नहीं था जैसा की कांग्रेस और मुस्लिम लीग मे 1916 मे समझौता हुआ था जिसे लखनऊ पैक्ट के नाम से भी जाना जाता है | ऐसी ही मांग अंबेडकर की भी थी महारों के लिए |

दिसंबर 1929 मे कुछ बदलावों के साथ नेहरू रिपोर्ट का प्रकाशन किया गया |

 ये वो समय था जब भगत सिंह की लोकप्रियता चरम पर थी | स्वाधीनता से कोई समझौता नही के विचार लोगों के मन मे आ गए थे | ऐसे मे 31 दिसंबर 1929 को कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन मे पूर्ण स्वराज्य की घोषणा करनी पड गई |

26 जनवरी 1930 को कांग्रेस ने अपना पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया |

अब आते है 15 अगस्त अंग्रेजों ने क्यों चुना वे भी तो कांग्रेस पर दया दिखाते हुए 26 जनवरी 1947 का दिन रख सकते थे |

दरअसल 6 अगस्त और 9 अगस्त 1945 को अमेरिका द्वारा जापान के दो महानगरों पर परमाणु बम गिराने के पश्चात जापान के राजा द्वारा 15 अगस्त 1945 को समर्पण की घोषणा कर दी गई |

इसे अंग्रेजों ने अपना मुक्ति दिवस या विजय दिवस माना |

इसलिए उनके लिए ये दिन खास था और उन्होंने यही दिन का चुनाव किया |

 अब इंडियन इंडेपेन्डेन्स एक्ट डोमिनीयन का दर्जा दे रहा था | जिसके अंतर्गत जवाहर लाल नेहरू प्रधानमंत्री बने |

तो कांग्रेस को भी अपना कुछ दिखाना था की उनकी कही तो चली भले देश बट गया |

इसलिए 26 जनवरी 1950 के दिन का निर्धारण किया गया |

तो 15 अगस्त को स्वाधीनता दिवस कहना उचित नहीं होगा |

उपगणराज्य का दर्जा मिला तो हम इसे उपगणराज्य तो कह सकते है और स्वाधीन तो हम पूर्णरुपेण कभी हुए ही नहीं | पूर्ण स्वराज्य की लड़ाई अभी बाकी है |

अब हम हमारे पहले प्रश्न पर आते है |

जब भारत को अंग्रेज अपनी संसद मे कानून बना के गए तो क्या कानून बना के वापस आ सकते है ?

दरअसल इंडियन इंडेपेन्डेन्स एक्ट की धारा 1 उपधारा 1 के अनुसार ये उपगणराज्य अपना स्वतंत्र संविधान बना सकते है | अतैव भारत ने अपना संविधान बना लिया |

इसकी धारा 6 उपधारा 2 ये स्पष्ट करती है की कोई भी विधि या प्रावधान इस उपगणराज्य के बनाए विधान मंडल का कोई भी कानून इस आधार पर निरस्त नहीं होगा की वह इंग्लैंड के कानून के विपरीत है और उपगणराज्य के विधान मण्डल को आधार होगा इस तरह के बने कानूनो को निरस्त करने का |

भारतीय संविधान के आर्टिकल 395 से इंडियन इंडेपेन्डेन्स एक्ट और गवर्मेंट आफ इंडिया एक्ट 1935 को निरस्त कर दिया गया |

हाँ इंग्लैंड ने अवश्य इंडियन इंडेपेन्डेन्स एक्ट को निरस्त नहीं किया है परंतु उसकी निरस्तता का अन्य अर्थ भी लिया जा सकता है |

भारत स्वयं को एक संप्रभु राष्ट्र घोषित कर चुका है |

तो ऐसे मे इंग्लैंड विपरीत परिस्तिथियों मे सीधे तो नहीं आ सकता है | भविष्य मे यदि हम प्रबल न हुए तो नेटो का प्रयोग कर के पाकिस्तान आदि की सहायता भले कर दे |

वैसे भी भारत इस्लामिक आतंकवाद और दलित आतंकवाद मे फसता जा रहा है | इंग्लैंड की फुट डालो राज करो की असली योजना अब फल देने लगी है |

हमे हमारे राष्ट्र की संप्रभुता को बनाए रखते हुए पूर्ण स्वराज्य की स्थापना करनी है ऐसा संकल्प लेना होगा |

Saturday, 3 August 2024

मनुस्मृति में मांसभक्षण निषेध

सम्पूर्ण वेदादी शास्त्र मांसाहार निषेध बताते है परंतु स्मृतियों मे भी निषेध है | मनुस्मृति के कुछ श्लोक प्रस्तुत है 

(1) योऽहिंसकानि भूतानि हिनस्त्यात्मसुखेच्छया ।

स जीवंश्च मृतश्चैव न क्वचित्सुखमेधते ।।-(मनु० ५/४५)*

अर्थ:-जो जीव वध-योग्य नहीं हैं,उनको जो कोई अपने सुख के निमित्त मारता है,वह जीवित दशा में भी मृतक-तुल्य है,वह कहीं भी सुख नहीं पाता है।

(2) यो बन्धनवधक्लेशान्प्राणिनां न चिकीर्षति ।

स सर्वस्य हितप्रेप्सुः सुखमत्यन्तमश्नुते ।।-(मनु० ५/४६)

अर्थ:-जो मनुष्य किसी जीव को बन्धन में रखने,वध करने व क्लेश देने की इच्छा नहीं रखता है,वह सबका हितेच्छु है,अतएव वह अनन्त सुख भोगता है।

(3) नाऽकृत्वा प्राणिनां हिंसां मांसमुत्पद्यते क्वचित्।

न च प्राणिवधः स्वर्ग्यस्तस्मान्मांसं विवर्जयेत् ।।-(मनु० ५/४८)

अर्थ:-जीवों की हिंसा बिना मांस की प्राप्ति नहीं होती और जीवों की हिंसा स्वर्ग-प्राप्ति (सुखविषेश) में बाधक है,अतः मांस-भक्षण कदापि नहीं करना चाहिए।

(4) समुत्पत्तिं तु मांसस्य वधबन्धौ च देहिनाम् ।

प्रसमीक्ष्य निवर्तेत सर्वमांसस्य भक्षणात् ।।-(मनु० ५/४९)

अर्थ:-मांस की उत्पत्ति,जीवों का बन्धन तथा उनकी हिंसा-इन बातों को देखकर सब प्रकार से मांस-भक्षण का त्याग करना चाहिए।

(5) न भक्षयति यो मांसं विधिं हित्वा पिशाचवत् ।

स लोके प्रियतां याति व्याधिभिश्च न पीड्यते ।।-(मनु० ५/५०)

अर्थ:-जो मनुष्य विधि त्यागकर पिशाच की तरह मांस-भक्षण नहीं करता वह संसार में सर्वप्रिय बन जाता है और विपत्ति के समय कष्ट नहीं पाता।

(6) अनुमन्ता विशसिता निहन्ता क्रयविक्रयी ।

संस्कर्ता चोपहर्ता च खादकश्चैति घातकाः ।।-(मनु० ५/५१)

अर्थ:-पशु-हत्या की अनुमति देने वाला,शस्त्र से मांस काटने वाला,मारने वाला,खरीदने वाला,बेचने वाला,पकाने वाला,परोसने वाला और खाने वाला,ये सब घातक अर्थात् कसाई हैं।

(7) वर्षे वर्षेऽश्वमेधेन यो यजेत शतं समाः ।

मांसानि च न खादेद्यस्तयोः पुण्यफलं समम् ।।-(मनु० ५/५३)

अर्थ:-जो मनुष्य सौ वर्ष-पर्यन्त प्रत्येक वर्ष एक बार अश्वमेध यज्ञ करता है तथा अन्य पुरुष जो मांसभक्षी नहीं है,इन दोनों के पुण्य का फल समान है।

(8) फलमूलाशनैर्मेध्यैर्मुन्यन्नानां च भोजनैः ।

न तत्फलमवाप्नोति यन्मांसपरिवर्जनात् ।।-(मनु० ५/५४)

अर्थ:-मनुष्य को सेब,केला आदि पवित्र फल,गाजर,मूली आदि कन्दमूल और मुनी-अन्न के खाने से वह फल प्राप्त नहीं होता,जो मांस-भक्षण के परित्याग से प्राप्त होता है।

Tuesday, 5 September 2023

आदित्य L1 की पूरी जानकारी, सूर्य पर जीवन को भी ढूंढ निकालेगा भारत की पहली सौर्य अंतरिक्षीय वेधशाला

 दिनांक 2 सितंबर 2023 को भारत ने अपनी पहली अंतरिक्षीय सौर्य वेधशाला पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर दूर स्थापित करने हेतु आदित्य एल-1 नाम का उपग्रह भेज दिया है |

आदित्य L1 को ISRO के विश्वसनीय रॉकेट PSLV से 11 बज कर 50 मिनट पर सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोट से प्रक्षेपण किया गया, जो की 125 दिन बाद लैंगरेंज पॉइंट 1 पर स्थापित होगा |

सूर्य के अध्ययन को लेकर भारत की ये पहली वेध शाला है जो अंतरिक्ष मे स्थापित होगी |

भारत मे खगोल विज्ञान के अध्ययन की एक बहुत पुरानी परंपरा है | भगवान श्री राम भी सूर्य के धब्बे को बता रहे है और आधुनिक समय मे भी वेध शालाये बनाने मे भी हम कभी पीछे नहीं रहे | आधुनिक समय अर्थात पिछले 800-1000 वर्ष, जिसमे की नवीन नाम से कुतुब मीनार कहा जाने वाला भवन हो या जंतर मनतर | महाराज जय सिंह द्वितीय ने जयपुर, नई दिल्ली, उज्जैन, मथुरा, वाराणसी मे 1734 से 1735 के बीच मे जो वेध शालाये स्थापित करी उन्हे हम जंतर मन्तर के नाम से जानते है जिनमे जयपुर और नई दिल्ली की वेध शालाये अभी भी अध्ययन करने योग्य है | इसके अतिरिक्त भारत मे अनेकों वेध शालाये है जिनमे कुछ सूर्य के अध्ययन को लेकर लक्षित है |

सयुक्त राज्य अमेरिका की नासा, यूरोप की यूरोपीयन स्पेस एजेंसी ई.एस.ए, जापान की जापान एरोस्पेस एक्सपलोरेशन जाकसा और चीन की नैशनल स्पेस साइंस सेंटेर के पश्चात भारत की इसरो अंतरिक्ष मे सौर्य वेधशाला भेजने वाला भारत पाचवा देश बन गया है |

 

कुछ प्रमुख वेध शालाओ के बारे मे जानते है |

 

L1 पॉइंट पर स्थापित होने वाली वेधशालाओ मे Solar and Heliospheric Observatory SOHO European Space Agency द्वारा निर्मित जिसे 2 दिसंबर 1995 मे लॉन्च किया गया था और मई 1996 मे ये कक्षा मे स्थापित हुआ था | इसे 2 वर्ष के लिए बनाया गया था पर इसे लगभग 27 वर्ष 9 मास हो गए है और ये अभी भी कार्य कर रहा है | इसने 4000 तक कॉमेटस की खोज कर ली है और येESA एवं NASA द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया जाता है |

 


Deep Space Climate Observatory
जिसे 11 फरवरी 2015 को स्पेस एक्स के रॉकेट से स्थापित किया गया था और 8 जून 2015 से यह कार्य कर रहा है | ये भी नासा द्वारा ही नियंत्रित है |

 


वर्ष 2018 मे नासा का सोलर पार्कर प्रॉब लॉन्च हुआ जो की 22 जून 2023 को अपनी 16 वी कक्षा मे प्रवेश करने पर 27 जून 2023 को सूर्य के अबतक सबसे निकटतम जाने वाला यान है | इसके साथ ही इसकी अधिकतम गति 191 किलोमीटर प्रतिघंटे की रही जिस से ये अब तक का मानव निर्मित सबसे तीव्रगति प्राप्त करने वाला यान बना |

L 2 पॉइट पर स्थापित करने के लिए जेम्स वेब स्पेस टेलएस्कोप 25 दिसंबर 2021 को लॉन्च किया गया जो की 12 जुलाई 2022 से सेवाये दे रहा है |

 

अब लँगरेंज पॉइंट्स को समझते है | 

पाँच लैंगरेंज प्वाइंट होते है जिसमे L1, L2, L3 अस्थिर है और L4, L5 स्थिर है | L4, L5 पृथ्वी की कक्षा के मार्ग पर है |


ये अंतरिक्ष मे वे बिन्दु है जहा वस्तुओ को भेजने पर ये उसी अवस्था मे रहते है | लैंगरेंज पाइंट पर सूर्य और पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण खिचाव किसी छोटे पिंड को उसी कक्षा मे रखने के लिए आवश्यक अभिकेंद्रीय बल यानि सेंटरिपीटल फोर्स के बराबर होता है |

इस प्रकार इन स्थानों पर उपग्रही वेधशाला को स्थापित करने से ईधन की खपत को न्यून कर दिया जाता है |

लैंगरेंज प्वाइंट इटालियन-फ्रेंच मूल के गणितज्ञ जोएसफी लोइस लँगरंजे के सम्मान मे दिया गया नाम है |


आदित्य
L1 लँगरंज 1 पर स्थापित होने पर सूर्य की बाहरी तीन परतों का अध्ययन करने मे सहायता करेगा | सूर्य की आन्तरिक्त परतों मे कोर, रेडियोएक्टिव जॉन, कंविक्सन जोन होती है और बाहरी परत मे फोटोसफीयर क्रोमोसफीयर और कोरोना है | क्रोमोसफीयर और कोरोना के बीच एक संक्रमनीय परत भी होती है जिसे अंग्रेजी मे ट्रांजिशन लेयर भी कहते है |

सूर्य का 73% द्रव्यमान हाइड्रोजन है और 25% हीलियम है अन्य 2% मे कार्बन, ऑक्सीजन एवं नाइट्रोजन है | सूर्य के कोर मे हाइड्रोजन हीलियम मे परिवर्तित होता है जिसे न्यूलीयर फ्यूशन कहते है | 
सूर्य के मूल मे देड़ करोड़ डिग्री सेंटीग्रेड का तापमान माना जाता है | वही ऊपरी परत पर लगभग 5600 डीगरी सेंटीग्रेड तापमान है वही सतह पर 1000 मील ऊपर चलने पर सूर्य की लहरों का तापमान लगभग 1 करोड़ डिग्री पहुच जाता है | ये वैज्ञानिकों के लिए चकराने वाली बात है | इस रहस्य से भी पर्दा उठाने के लिए आकडे इकट्ठा करेगा आदित्य L1 क्योंकी इस वेधशाला और सूर्य के बीच कोई अन्य बाधा नहीं होगी |

1480 kg वजनी आदित्य L1 मे कुल 7 पेलोड लगे है जिसमे 4 रिमोट सेन्सिंग और 3 In-situ उपकरण है |

पहला उपकरण है VELC visible emission line chronograph ये एक ultraviolet reflective telescope है | ये प्रतिदिन सूर्य से 1440 चित्र पृथ्वी पर भेजेगा |

इसे आप अभियांत्रिकी चमत्कार कह सकते है | इसकी आंतरिक संरचना बेहद जटिल है और अत्यंत गणतीय परिश्रम का परिणाम हैं |

VELC, को Indian Institute of Astrophysics (IIA), Bengaluru, Laboratory of electro optical system, Bengaluru, U R Rao Satellite center, Bengaluru, ISRO inertial system unit and space application center, त्रिवन्तपुरम ने संयुक्त रूप से विकसित किया है |

दूसरा Solar low energy spectrometer SOLexs  जो की सोलर साफ्ट एक्स रे फ्लक्स को अध्ययन करता है यानि सॉफ्ट एक्स रे स्पेक्टरोमीटर है | इसे U R Rao satellite center द्वारा विकसित किया गया है |

तीसरा  हाई एनर्जी एल 1 ऑरबिटिङ एक्सरे स्पेक्टरोंमीटर Hel1os

ये हार्ड एक्स रे स्पेक्टरोमीटर है इसे भी U R Rao satellite center द्वारा विकसित किया गया है |

चौथा Solar ultra violet Imaging telescope है जो की UV telescope ये फोटोसफीयर और क्रोमोसफीयर का अध्ययन करेगा इसे Inter University for astronomy and astrophysics, Pune ISRO ने संयुक्त रूप से विकसित किया है |

पाचवा Aditya solar wind particle experimental Aspex

In-situ observations के लिए बनाया गया है यह Low energy particles and high energy ions के अध्ययन के लिए लगाया गया है इसे Physical Research Laboratory, Karnavarti जिसे की Ahmedabad कहा जाता है ने विकसित किया है |

छठवा Plasma Analyser Package for Aditya जिसे संक्षेप PAPA नाम दिया गया है  solar winds का mass analysis करेगा | इसे Space Physics Laboratory, Vikram Sarabhai Space Center, त्रिवन्तपुरम ने विकसित किया है |

सातवा Magnetometer हैं जो की Interplanatery magnetic fields magnetic sensors से मेसर करेगा इसे Electro Optics Systems बैंगलुरु ने विकसित किया है |

कहने वाले यह तो कह सकते है की भारत ने थोड़ा विलंभ से अंतरिक्ष मे सूर्य के अध्ययन को लेकर वेधशाला स्थापित करी पर यदि हम इसरो का इतिहास देखे तो पाएंगे की दूसरों से सीख कर हमारे वैज्ञानिकों ने कार्य कही दक्षता से किया है |

इन पेलोड्स से यह एकदम स्पष्ट हो गया है |

 

वर्ष 2008 मे एड्वाइसरी कमेटी फॉर स्पेस एजेंसी, ने सौर्य मिशन का सुझाव दिया था | 2016-17 मे इसके लिए 3 करोड़ भारतीय रुपये प्रस्तावित हुए | अंतरिक्ष मे प्रक्षेपण होते होते इसमे 400 करोड़ रुपये के लगभग लग गए |

 

सभी उपकरणों को संयोजित कर के आदित्य L1 बना है जिसे PSLV rocket के ऊपरी भाग मे लगाया गया | इन सबको सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, की Vehicle Assembly Building मे जोड़ा गया जो की लॉन्च पैड से 900 मीटर दूर है पी एस एल वी के ऊपरी भाग मे आदित्य एल 1 को रख कर साइट पर पहुचाया गया जहा से इसे अंतरिक्ष मे प्रक्षेपित किया गया |

इसके अतिरिक्त भी सूर्य के विषय मे अनेकों रहस्य है | सूर्य पर जीवन की संभावना भी वैज्ञानिक भी जता चुके है | कुछ वर्षों पूर्व लीजलेना नाम का बाइटेरिया मिला जो गर्म पानी मे जीवित राहत है इस प्रकार के थर्मोपाइल्स जो की 45 से 80 डीगरी सेलसिउस मे रहने पर वैज्ञानिकों की सोच मे बदलाव ले आए | यहा तक की लावा मे भी सूक्ष्म जीव पाए गए है |

इस कारण वातावरण अनुसार जीवन की संभावना पर भी वैज्ञानिक विचार करने लगे |

तो क्या सूर्य पर किसी प्रकार का जीवन हो सकता है ? क्या प्लासमा से निर्मित कोई जीवन भी संभव है ? इस से संबंधित भी जानकारिया मिल हमे आदित्य एल 1 से हमे मिल सकती है | इस विषय पर आपकी क्या राय है हमे कमेन्ट मे बताए |


Sunday, 2 June 2019

डा. बाबा साहब आंबेडकर की २२ प्रतिज्ञाएँ

आज कथित हिंदूवादी दल से लेकर हर एक डा. अम्बेडकर को महान बताने पर तुले हुए है | महानता एक सापेक्ष विषय हो सकता है जब समाज बट जाए | आर्य समाज की स्थापना करने वाले, दलितों को भी एक सामान वेद की शिक्षा जनेऊ का अधिकार देने वाले देश धर्म जाती उद्धारक स्वामी दयानन्द, दलितोद्धार का कितना काम करने वाले महान सन्यासी गुरुकुल कांगड़ी के संस्थापक, हिन्दू शुद्धि सभा के अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानन्द, देश के लिए अनेको अनेक यातनाये झेलने वाले वीर सावरकर के दलितों के लिए कार्य नहीं बताता पर डा. अम्बेडकर को एकाएक महान बताने की झड़ी लग गयी है प्रतिमाये लगने लग गयी है | आरक्षण  का लाभ लेते लेते ७० साल हो चुके है क्या ये हिन्दू धर्म के दमन का दौर आगया है | सत्य को इस प्रकार कब तक छुपाया जाएगा | आंबेडकर जिन्हे जीते जी जन मत ने नकार दिया था और बुरी तरह नकार दिया था |
खैर डा. अम्बेडकर ने हिन्दू धर्म त्याग कर बौद्ध मत स्वीकारा और २२ प्रतिज्ञाएं ली जो निम्न है और अंतरजाल पर हर जगह मिल जायेगी | उन्हें जानिये और अपनी राय बनाइये
बौद्ध धर्म की दीक्षा लेने के लिए 22 प्रतिज्ञाएं:-


1. मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश को कभी ईश्वर नहीं मानूंगा और न ही मैं उनकी पूजा करूंगा.
2. मैं राम और कृष्ण को कभी ईश्वर नहीं मानूंगा, और न ही मैं उनकी पूजा करूंगा.
3. मैं गौरी, गणपति जैसे हिंदू धर्म के किसी देवी देवता को नहीं मानूंगा और न ही उनकी पूजा करूंगा.
4. ईश्वर ने कभी अवतार लिया है, इस पर मेरा विश्वास नहीं.
5. मैं ऐसा कभी नहीं मानूंगा कि तथागत बौद्ध विष्णु के अवतार हैं. ऐसे प्रचार को मैं पागलपन और झूठा समझता हूं.
6. मैं कभी श्राद्ध नहीं करूंगा और न ही पिंडदान करवाऊंगा.
7. मैं बौध धम्म के विरुद्ध कभी कोई आचरण नहीं करूंगा.
8. मैं कोई भी क्रिया-कर्म ब्राह्मणों के हाथों से नहीं करवाऊंगा.
9. मैं इस सिद्धांत को मानूंगा कि सभी इंसान एक समान हैं.
10. मैं समानता की स्थापना का यत्न करूंगा.
11. मैं बुद्ध के आष्टांग मार्ग का पूरी तरह पालन करूंगा.
12. मैं बुद्ध के द्वारा बताई हुई दस परिमिताओं का पूरा पालन करूंगा.
13. मैं प्राणी मात्र पर दया रखूंगा और उनका लालन-पालन करूंगा.
14. मैं चोरी नहीं करूंगा.
15. मैं झूठ नहीं बोलूंगा.
16. मैं व्याभिचार नहीं करूंगा.
17. मैं शराब नहीं पीऊंगा.
18. मैं अपने जीवन को बुद्ध धम्म के तीन तत्वों-अथार्त प्रज्ञा, शील और करुणा पर ढालने का यत्न करूंगा.
19. मैं मानव मात्र के विकास के लिए हानिकारक और मनुष्य मात्र को उच्च– नीच मानने वाले अपने पुराने हिंदू धर्म को पूर्णत: त्यागता हूं और बुद्ध धम्म को स्वीकार करता हूं.
20. यह मेरा पूर्ण विश्वास है कि गौतम बुद्ध का धम्म ही सही धम्म है.
21. मैं यह मानता हूं कि अब मेरा नया जन्म हो गया है.
22. मैं यह प्रतिज्ञा करता हूँ कि आज से मैं बुद्ध धम्म के अनुसार आचरण करूंगा.
श्रोत : आजतक 

इसका वीडियो रुपातरण
https://youtu.be/EQBzpojo570


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